लिपियाँ और भाषाएँ
अशोक की शिलाओं पर ब्राह्मी से जावा और कम्बोडिया की लिपियों तक, और वैदिक संस्कृत से आज की भाषाओं तक: हर एक का सबसे पुराना अभिलेख, उसका विकास, और किसने उसे फिर से पढ़ा।
32लिपि और भाषा
लिपियाँ
लगभग 2600–1900 ई.पू. (परिपक्व हड़प्पा काल)सिन्धु लिपिसिन्धु लिपिमोहनजोदड़ो, हड़प्पा और धोलावीरा की मुहरों पर खुदे चिह्न भारत का सबसे पुराना लेखन हैं।
लगभग तीसरी शताब्दी ई.पू. सेब्राह्मीब्राह्मीब्राह्मी अशोक के अभिलेखों की लिपि है और भारत, लंका, तिब्बत तथा दक्षिण-पूर्व एशिया की लगभग हर लिपि की जननी है।
लगभग तीसरी शताब्दी ई.पू. – चौथी शताब्दी ई.खरोष्ठीखरोष्ठीखरोष्ठी गांधार की लिपि थी, दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी; पश्चिमोत्तर में अशोक के शिलालेख और मध्य एशिया तक पहुँचे बौद्ध ग्रन्थ इसी में लिखे गए।
लगभग दूसरी शताब्दी ई.पू. सेतमिल लिपि (तमिल-ब्राह्मी, वट्टेलुत्तु, तमिल)तमिऴ् लिपितमिल दो हज़ार वर्ष से अधिक समय से लिखी जा रही है; पहले गुफा-शय्याओं और ठीकरों पर तमिल-ब्राह्मी में, फिर गोल वट्टेलुत्तु में, फिर आज की लिपि में।
लगभग चौथी–छठी शताब्दी ई.गुप्त लिपिगुप्त लिपिगुप्त अभिलेखों के गोलाई लिए, सिर पर काँटेदार अक्षर ब्राह्मी का वह रूप हैं जिससे सिद्धम, शारदा, नागरी और तिब्बती लिपियाँ निकलीं।
लगभग पाँचवीं शताब्दी ई. सेतेलुगु-कन्नड़ लिपितेलुगु-कन्नड लिपिकदम्ब और बादामी के चालुक्य एक ही गोलाई वाली दक्षिणी लिपि लिखते थे; मध्यकाल में यह आज की कन्नड़ और तेलुगु लिपियों में बँट गई।
लगभग छठी शताब्दी ई. सेसिद्धम (सिद्धमातृका)सिद्धमातृकासिद्धम गुप्त लिपि से निकली और नागरी तथा पूर्वी लिपियों की जननी बनी; बौद्ध भिक्षुओं के साथ जापान पहुँची, जहाँ आज भी लिखी जाती है।
लगभग छठी–सातवीं शताब्दी ई. सेग्रन्थ लिपिग्रन्थग्रन्थ वह लिपि है जिसमें तमिल देश संस्कृत लिखता था।
पाँचवीं शताब्दी से संस्कृत अभिलेख; खमेर भाषा 611 ई. सेखमेर लिपिखमेर लिपिअंगकोर की लिपि दक्षिण भारत के पल्लव अक्षरों से निकली।
लगभग सातवीं–आठवीं शताब्दी ई. से; दसवीं तक पूर्ण रूपनागरी और देवनागरीदेवनागरीहर शब्द के ऊपर खिंची शिरोरेखा वाली देवनागरी संस्कृत की छपाई, हिन्दी, मराठी, नेपाली और दर्जन भर अन्य भाषाओं की लिपि है।
लगभग आठवीं शताब्दी ई. सेशारदाशारदाकश्मीर की देवी शारदा के नाम वाली यह लिपि हज़ार वर्ष तक घाटी की संस्कृत विद्या की वाहक रही, और गुरमुखी तथा टाकरी की पूर्वज है।
लगभग आठवीं शताब्दी ई. सेकवि लिपि (पुरानी जावानी लिपि)कविपल्लव अक्षरों से निकली कवि लिपि हिन्दू और बौद्ध जावा तथा बाली की लिपि थी; बाली और जावानी लेखन इसी के वंशज हैं।
परम्परा के अनुसार सातवीं शताब्दी ई.; सबसे पुराना तिथियुक्त अभिलेख लगभग 764 ई.तिब्बती लिपिभोट लिपितिब्बती लेखन गुप्त परिवार की एक भारतीय लिपि के नमूने पर बना।
लगभग दसवीं–ग्यारहवीं शताब्दी ई. सेबांग्ला-असमिया लिपि (पूर्वी नागरी)पूर्वी नागरीपूर्व में एक ही लिपि, थोड़े अन्तर के साथ, बांग्ला, असमिया, मणिपुरी और संस्कृत लिखती है।
बारहवीं शताब्दी ई. सेतिगलारी (तुलु-तिगलारी)तिगलारीतिगलारी तटीय कर्नाटक की ताड़पत्र लिपि है, जिसमें तुलु पुरोहितों ने वेद और माध्व परम्परा के ग्रन्थ उतारे।
सत्रहवीं शताब्दी ई. से बचे दस्तावेज़; बीसवीं शताब्दी के मध्य तक प्रयोगमोडीमोडीमोडी वह तेज़, बहती लिखावट थी जिसमें व्यापार और शासन के लिए मराठी लिखी जाती थी; शिवाजी महाराज के पत्र और पेशवा दफ़्तर इसी में हैं।भाषाएँ
परम्परा में अनादि; बाहर का पहला अभिलेख लगभग 1380 ई.पू.वैदिक संस्कृतवैदिक संस्कृतम्वेदों की भाषा; वेद अपौरुषेय हैं और ऋषि-कुलों ने उन्हें मुख से कान तक, अक्षर-अक्षर और स्वर सहित, आज तक पहुँचाया है।
लगभग तीसरी शताब्दी ई.पू. सेप्राकृत भाषाएँ: पालि, अर्धमागधी, महाराष्ट्रीप्राकृतप्राकृत प्राचीन भारत की बोलचाल की भाषाएँ थीं।
लगभग दूसरी शताब्दी ई.पू. सेतमिलतमिऴ्तमिल का लिखित इतिहास दो हज़ार वर्ष से अधिक का है और कहीं टूटा नहीं: संगम काव्य और तिरुक्कुरल से तेवारम, दिव्य प्रबन्धम और भारती तक।
पाणिनि का व्याकरण; 150 ई. से लम्बे अभिलेखलौकिक संस्कृतसंस्कृतम्पाणिनि की अष्टाध्यायी से स्थिर हुई संस्कृत गांधार से जावा तक शास्त्र, काव्य, विज्ञान और राजसत्ता की साझा भाषा बनी।
लगभग पाँचवीं शताब्दी ई. सेकन्नड़कन्नडकन्नड़ के पास पन्द्रह शताब्दियों के अभिलेख और साहित्य हैं: हल्मिडि शिलालेख और पम्प के महाकाव्यों से बसवण्णा के वचनों और हरिदासों के गीतों तक।
575 ई. से अभिलेख; ग्यारहवीं शताब्दी से साहित्यतेलुगुतेलुगुनन्नय के महाभारत, पोतन के भागवत, अन्नमाचार्य के संकीर्तनों और त्यागराज की कृतियों की भाषा तेलुगु दक्षिण की किसी भी दूसरी भाषा से अधिक भारतीयों द्वारा बोली जाती है।अपभ्रंशलगभग छठी–बारहवीं शताब्दी ई.अपभ्रंशअपभ्रंशअपभ्रंश प्राकृतों और उत्तर तथा पूर्व भारत की आधुनिक भाषाओं के बीच का पुल है; हिन्दी, बांग्ला, गुजराती, पंजाबी और ओड़िया सब इसके क्षेत्रीय रूपों से निकलीं।
लगभग नवीं शताब्दी ई. सेमलयालममलयाळम्मलयालम पुराने तमिल देश की पश्चिमी बोली से अलग होकर अपनी भाषा बनी; पहले वट्टेलुत्तु में लिखी गई और फिर ग्रन्थ से बनी लिपि में।बाङ्लालगभग दसवीं–बारहवीं शताब्दी ई. सेबांग्लाबाङ्लाबांग्ला चर्यापद और चण्डीदास से चैतन्य के कीर्तन होते हुए बंकिम के वन्दे मातरम् और टैगोर तक जाती है, जिन्होंने दो देशों के राष्ट्रगान लिखे।
ग्यारहवीं शताब्दी ई. सेओड़ियाओड़िआसारला दास के महाभारत और पंचसखा कवियों की भाषा ओड़िया ताड़पत्र पर लेखनी से ढली गोल लिपि में लिखी जाती है; 2014 में इसे शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
लगभग ग्यारहवीं–बारहवीं शताब्दी ई. सेमराठीमराठीमहाराष्ट्री प्राकृत से निकली मराठी ज्ञानेश्वर और तुकाराम की, पंढरपुर के वारकरी तीर्थयात्रियों की और मराठा राज्य की भाषा है।ગુજરાતીबारहवीं शताब्दी ई. सेगुजरातीગુજરાતીनरसिंह मेहता के भजनों और गांधीजी के अपने लेखन की भाषा गुजराती ऐसी लिपि में लिखी जाती है जिसने नागरी की शिरोरेखा छोड़ दी।
बाबा फ़रीद की वाणी तेरहवीं शताब्दी; आदि ग्रन्थ 1604 ई.पंजाबी और गुरमुखीਪੰਜਾਬੀपंजाबी गुरु ग्रन्थ साहिब, वारिस शाह की हीर और पंजाब के गीतों की भाषा है; सिख गुरुओं द्वारा गढ़ी लिपि गुरमुखी भारत में इसे लिखती है।
पुरानी हिन्दी लगभग बारहवीं–तेरहवीं शताब्दी ई. से; खड़ी बोली गद्य उन्नीसवीं सेहिन्दी और हिन्दुस्तानीहिन्दीहिन्दी गंगा-यमुना प्रदेश की बोली से विकसित हुई।काश्मीरीसाहित्य लगभग चौदहवीं शताब्दी ई. सेकश्मीरी (कॉशुर)काश्मीरीघाटी की बोली कश्मीरी ने भारत को लल्लेश्वरी के वाख दिए, उस शैव योगिनी के, जिनकी वाणी आज भी हर कश्मीरी की ज़ुबान पर है।
साहित्य लगभग तेरहवीं–चौदहवीं शताब्दी ई. सेअसमियाঅসমীয়াअसमिया माधव कन्दली की रामायण, श्रीमन्त शंकरदेव के बरगीत और अंकीया नाट, और अहोम बुरंजियों की भाषा है।