कन्नड

कन्नड़

कन्नड़ के पास पन्द्रह शताब्दियों के अभिलेख और साहित्य हैं: हल्मिडि शिलालेख और पम्प के महाकाव्यों से बसवण्णा के वचनों और हरिदासों के गीतों तक।

चित्र: en:User:Dineshkannambadi · CC BY-SA 3.0
प्रकार
भाषाएँ
तिथि
लगभग पाँचवीं शताब्दी ई. से
परिवार
द्रविड़, दक्षिणी
सबसे पुराना अभिलेख
कदम्बों का हल्मिडि शिलालेख, लगभग 450 ई.
बोलने वाले
भारत में 4,37,06,512 (जनगणना 2011)
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“कन्नड़.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/lipi/kannada-language/. देखा गया .

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Hindu History. (2026). कन्नड़. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/lipi/kannada-language/

01हल्मिडि का शिलालेख

1936 में हासन ज़िले के हल्मिडि गाँव में एक शिलालेख मिला, जो कदम्ब राजा काकुत्स्थवर्मा के समय के एक भूमि-दान का उल्लेख करता है। लिपि के आधार पर लगभग 450 ई. का यह लेख कन्नड़ भाषा का सबसे पुराना पूर्ण अभिलेख है; मूल शिला अब मैसूरु के एक संग्रहालय में है और गाँव में उसकी प्रतिकृति खड़ी है। आगे की सदियों में बादामी के चालुक्यों, राष्ट्रकूटों और होयसलों ने दसियों हज़ार कन्नड़ अभिलेख छोड़े, लगभग किसी भी दूसरी भारतीय भाषा से अधिक।

02कविराजमार्ग से हरिदासों तक

नवीं शताब्दी में राष्ट्रकूट राजा अमोघवर्ष प्रथम के दरबार से निकला काव्यशास्त्र ग्रन्थ कविराजमार्ग कन्नड़ देश को कावेरी से गोदावरी तक फैला बताता है। आदिकवि पम्प ने 941 में विक्रमार्जुन विजय लिखा; उनके बाद पोन्न और रन्न आए। बारहवीं शताब्दी में बसवण्णा और शरणों ने वचन लिखे, रोज़ की बोली में शिव को सम्बोधित छोटी गद्य-कविताएँ। पुरन्दर दास और कनकदास ने कन्नड़ में विट्ठल और कृष्ण के गीत गाए, और पुरन्दर दास के पाठ आज भी कर्णाटक संगीत के विद्यार्थी के पहले पाठ हैं।

03आज

2008 में कन्नड़ को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया। यह कर्नाटक की राजभाषा है, और इसके लेखकों ने 1967 में कुवेम्पु से आरम्भ कर आठ ज्ञानपीठ पुरस्कार जीते हैं। 2011 की जनगणना में 4,37,06,512 कन्नड़ भाषी गिने गए, और राज्य के लाखों तुलु, कोडव, कोंकणी और बेअरी भाषियों की यह दूसरी भाषा भी है। 1 नवम्बर को राज्योत्सव दिवस 1956 में कन्नड़ भाषी राज्य के बनने की याद में मनाया जाता है।

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