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“तमिल लिपि (तमिल-ब्राह्मी, वट्टेलुत्तु, तमिल).” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/lipi/tamil-script/. देखा गया .
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Hindu History. (2026). तमिल लिपि (तमिल-ब्राह्मी, वट्टेलुत्तु, तमिल). प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/lipi/tamil-script/
01पत्थर की शय्याओं पर अक्षर
मदुरै के आसपास की पहाड़ियों में जैन मुनि चट्टान में कटी शय्याओं पर सोते थे, और उन्हें बनवाने वाले दाताओं के नाम ऊपर खोदे गए। लगभग दूसरी शताब्दी ई.पू. के मांगुलम लेख पाण्ड्य राजा नेडुंजेलियन का नाम लेते हैं। इस तमिल-ब्राह्मी ने ब्राह्मी को तमिल ध्वनियों के अनुसार ढाला और ऴ तथा ऱ जैसे अक्षर जोड़े। यही अक्षर कीलाडी, अरिकमेडु और आदिचनल्लूर के ठीकरों पर, मिस्र के लाल सागर बन्दरगाहों में और थाईलैंड में भी मिले हैं। तमिलनाडु पुरातत्व विभाग कीलाडी की परतों को लगभग छठी शताब्दी ई.पू. का मानता है; इस तिथि पर अभी चर्चा चल रही है।
02वट्टेलुत्तु और चोल लिखावट
लगभग पाँचवीं शताब्दी से पाण्ड्य देश और केरल में एक गोल, बहती लिखावट वट्टेलुत्तु, यानी ‘गोल अक्षर’, चल पड़ी; आठवीं शताब्दी का वेल्विकुडि दानपत्र तमिल के लिए इसका और संस्कृत के लिए ग्रन्थ का प्रयोग करता है। पल्लव और चोल प्रदेश में ग्रन्थ के प्रभाव से एक और रूप बना, और राजराज चोल के समय तक वह आज के तमिल अक्षरों के बहुत निकट था। तंजावुर के बृहदीश्वर मन्दिर की दीवारों के लम्बे लेख और उत्तरमेरूर की ग्राम-सभा के नियम इसी में हैं।
03पठन, छपाई, सुधार
1924 में के. वी. सुब्रह्मण्य अय्यर ने दिखाया कि गुफा-लेख तमिल भाषा में हैं, और इरावतम महादेवन की ‘अर्ली तमिल एपिग्राफ़ी’ (2003) ने इन सबको एक जगह संकलित किया। चल टाइप में छपने वाली पहली भारतीय लिपियों में तमिल थी: 1578 में छपी ‘तम्बिरान वणक्कम’ किसी भारतीय लिपि की सबसे पुरानी ज्ञात छपी पुस्तक है। आज यह लिपि तमिलनाडु, श्रीलंका और सिंगापुर में आधिकारिक है।












