कथक

उत्तर भारत के कथाकारों का नृत्य, जो मंदिर-प्रांगणों में श्रीकृष्ण की लीलाएँ और रामायण सुनाते थे। इसकी पहचान तेज़ पद-संचालन और चक्कर हैं।

चित्र: Rhythm India · CC0
कला
शास्त्रीय नृत्य
तिथि
मंदिरों के कथाकार; दरबारी रूप 16वीं–19वीं शताब्दी
क्षेत्र
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश
युग
मुग़ल काल और प्रतिरोध
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“कथक.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/kala/kathak/. देखा गया .

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Hindu History. (2026). कथक. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/kala/kathak/

इसकी पहचान

  1. 01

    घुँघरू के साथ तत्कार

  2. 02

    सम पर रुकते चक्कर

  3. 03

    नाचने से पहले बोले गए बोल

  4. 04

    कृष्ण-विषयक गत-भाव और अभिनय

  5. 05

    लखनऊ, जयपुर और बनारस घराने

01कथा कहे सो कथक

कथाकार ब्रज, काशी और अयोध्या के मंदिरों से जुड़े वाचक परिवार थे, जो कथाएँ गाकर और भाव से अभिनय करके सुनाते थे। 16वीं शताब्दी में ब्रज की रासलीला ने इसे कृष्ण-प्रधान विषय दिए। बाद में यह दरबारों में पहुँचा: जयपुर और रायगढ़ के राजा और अवध के नवाब नर्तक रखते थे, और लखनऊ में वाजिद अली शाह के समय दुर्गा प्रसाद और ठाकुर प्रसाद के परिवार ने, और दुर्गा प्रसाद के पुत्रों बिन्दादीन महाराज और कालका प्रसाद ने, लखनऊ शैली बनाई। बिन्दादीन ने कृष्ण पर सैकड़ों ठुमरियाँ रचीं।

02तत्कार, चक्कर और भाव

नर्तक सीधा खड़ा रहता है, हर टखने पर सौ या अधिक घुँघरू बाँधता है और तत्कार में सपाट पैर से ताल ठोकता है, तबले के हर बोल का उत्तर देते हुए। चक्कर समूहों में आते हैं और ठीक सम पर रुकते हैं। प्रस्तुति वन्दना से शुरू होती है, फिर थाट, आमद, टुकड़े और परन, और अन्त में किसी ठुमरी या भजन पर गत-भाव और अभिनय। जयपुर घराना बल और लय को, लखनऊ लालित्य और भाव को, और बनारस अपने स्वच्छ पद-संचालन को महत्त्व देता है।

03गुरु और कहाँ देखें

अच्छन महाराज, शम्भू महाराज और लच्छू महाराज लखनऊ परम्परा को 20वीं शताब्दी में लाए, और अच्छन के पुत्र बिरजू महाराज (1938–2022) इसका सबसे जाना-पहचाना चेहरा बने। जयपुर ने जयलाल और सुन्दर प्रसाद दिए; बनारस ने सितारा देवी; अहमदाबाद में कुमुदिनी लाखिया और पुणे में रोहिणी भाटे ने नया काम किया। दिल्ली का कथक केन्द्र नर्तक तैयार करता है, और हर फ़रवरी खजुराहो नृत्य समारोह मंदिरों के सामने कथक का मंच सजाता है।

महान आचार्य और कलाकार

बिन्दादीन महाराजशम्भू महाराजबिरजू महाराजसितारा देवीसुन्दर प्रसादकुमुदिनी लाखिया

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