दीपावली

दीपावली

कार्तिक की सबसे अँधेरी रात, जिसे मिट्टी के दीयों की पंक्तियाँ उजाला कर देती हैं। संध्या को लक्ष्मी पूजन होता है, घर बुहारकर माँ के लिए खोल दिया जाता है। उत्तर में यह श्रीराम के अयोध्या लौटने की रात है, दक्षिण में श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर-वध की।

मास: कार्तिक अमावस्या (अमान्त गणना में आश्विन अमावस्या)प्रायः: अक्टूबर–नवंबरऋतु: शरद ऋतुदेवता: माता लक्ष्मी
चित्र: Alokjain19883105 · CC BY-SA 4.0
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“दीपावली.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/utsav/diwali/. देखा गया .

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Hindu History. (2026). दीपावली. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/utsav/diwali/

कैसे मनाते हैं

  1. 01

    दहलीज़, दीवारों और छतों पर तिल या सरसों के तेल के मिट्टी के दीयों की पंक्तियाँ

  2. 02

    सूर्यास्त के बाद लक्ष्मी–गणेश पूजन, व्यापारियों के लिए नए बही-खाते

  3. 03

    दक्षिण में नरक चतुर्दशी को भोर से पहले तेल-स्नान

  4. 04

    द्वार पर रंगोली या कोलम और भीतर की ओर बनाए लक्ष्मी के चरण

  5. 05

    पड़ोसियों और सम्बन्धियों में मिठाई और उपहार का आदान-प्रदान

01राम और कृष्ण के दीप

उत्तर भारत की कथा यह है कि चौदह वर्ष के वनवास और लंका-युद्ध के बाद जब श्रीराम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे तो नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया; सरयू के घाट आज भी इस रात जगमगा उठते हैं। तमिलनाडु, कर्नाटक और आन्ध्र में उससे पहले का दिन, नरक चतुर्दशी, ही मुख्य दीपावली है: सत्यभामा के साथ श्रीकृष्ण ने प्रागज्योतिष के नरकासुर का वध किया था, और परिवार भोर से पहले उठकर तेल-स्नान करते हैं।

अमावस्या की संध्या को गणेश के साथ लक्ष्मी पूजन होता है। व्यापारी नए बही-खाते खोलते हैं; गुजरात और मारवाड़ी घरानों का चोपड़ा पूजन यही है।

02पुराने ग्रन्थ क्या कहते हैं

सातवीं शताब्दी में सम्राट हर्ष के नाटक नागानन्द में दीपप्रतिपदुत्सव का नाम आता है, अमावस्या के बाद की प्रतिपदा पर दीपों का उत्सव। दसवीं शताब्दी में राजशेखर अपनी काव्यमीमांसा में इसे दीपमालिका कहते हैं। ग्यारहवीं शताब्दी के आरम्भ में भारत में रहे अल-बिरूनी ने लिखा कि हिन्दू कार्तिक की अमावस्या को दीप जलाकर, उपहार देकर पर्व मनाते हैं और उस दिन लक्ष्मी का सम्मान होता है।

दिसंबर 2025 में दिल्ली के लाल क़िले में हुए अधिवेशन में यूनेस्को ने दीपावली को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में स्थान दिया।

03प्रकाश के पाँच दिन

उत्तर भारत के अधिकांश भाग में दीपावली पाँच दिनों का मध्य दिन है: धनतेरस, नरक चतुर्दशी (छोटी दीवाली), अमावस्या को लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा या बलि प्रतिपदा, और भाई दूज। बंगाल, असम और ओडिशा में यही रात काली पूजा की है। नेपाल पाँच दिन का तिहार मनाता है, जिसमें लक्ष्मी पूजा और भाई टीका से पहले कौवे, कुत्ते और गाय का सम्मान होता है। त्रिनिदाद, गयाना, फ़िजी और मॉरीशस में, जहाँ उन्नीसवीं शताब्दी में गिरमिटिया परिवार इस पर्व को साथ ले गए, दिवाली सार्वजनिक अवकाश है।

कहाँ

पूरा भारत, नेपाल (तिहार के रूप में) और विदेश का हर हिन्दू घर: फ़िजी, मॉरीशस, त्रिनिदाद, गयाना, सूरीनाम, मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका, ब्रिटेन, उत्तर अमेरिका

इसी मास में