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“छठ पूजा.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/utsav/chhath/. देखा गया .
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Hindu History. (2026). छठ पूजा. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/utsav/chhath/
कैसे मनाते हैं
- 01
चार दिनों में नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य
- 02
खरना के बाद 36 घंटे का निर्जल उपवास
- 03
बाँस के सूप में गेहूँ-गुड़ का ठेकुआ, गन्ना और फल
- 04
नदी में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य
- 05
घाट जाते हुए स्त्रियों के छठ गीत
01सूर्यदेव और छठी मैया
छठ सूर्यदेव की उपासना है, जो आँखों से दिखने वाले देवता हैं, और साथ में छठी मैया की, षष्ठी देवी जो सन्तान की रक्षा करती हैं। बिहार में कहा जाता है कि सूर्यपुत्र कर्ण प्रतिदिन कमर तक जल में खड़े होकर अर्घ्य देते थे, और राज्य खो देने पर द्रौपदी ने यह व्रत रखा था। एक और लोककथा अयोध्या लौटने के बाद सीता की पहली छठ को मुंगेर से जोड़ती है। औरंगाबाद ज़िले का देव सूर्य मन्दिर इसके बड़े केन्द्रों में है, जहाँ लाखों लोग जुटते हैं।
02चार दिन
चतुर्थी को नहाय-खाय: व्रती स्नान कर भात, चने की दाल और लौकी का एक समय भोजन करती हैं। पंचमी को खरना: दिन भर उपवास, रात में गुड़ की रसियाव-खीर और रोटी से पारण, जिसके बाद अन्त तक न अन्न न जल। षष्ठी की संध्या को सँझिया अर्घ्य: परिवार ठेकुआ, गन्ना, नारियल और नींबू से भरे बाँस के सूप घाट पर ले जाता है, और व्रती डूबते सूर्य को दूध और जल का अर्घ्य देती हैं। सप्तमी को भोर से पहले वे उगते सूर्य को भोरवा अर्घ्य देने लौटते हैं, तभी व्रत टूटता है। पुरोहित की आवश्यकता नहीं; गीत स्त्रियाँ स्वयं गाती हैं।
बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, नेपाल की तराई; और दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, मॉरीशस, फ़िजी, त्रिनिदाद व सूरीनाम के भोजपुरी-मैथिल परिवार



