चित्र: Jayaseerlourdhuraj · CC BY-SA 3.0
उत्खनन · लगभग दूसरी शताब्दी ई.पू.–दूसरी शताब्दी ई.; 1945 से उत्खनन

अरिकमेडु का उत्खनन

प्राप्ति
पुदुच्चेरी के दक्षिण में अरियांकुप्पम नदी पर; 1945 में मॉर्टिमर व्हीलर ने यहाँ खुदाई की, फिर ज़्याँ-मारी कसाल ने और 1989–92 में विमला बेगली ने
अब कहाँ
अपने स्थान पर; बहुत से अवशेष पुदुच्चेरी संग्रहालय में

संगम युग का एक तमिल बन्दरगाह, जहाँ रोमन मृद्भांड, मदिरा के घड़े और भारतीय मनके एक साथ मिले।

यह क्या कहता है

खाइयों में इटली में बनी लाल चमकदार अरेटाइन मृद्भांड, भूमध्यसागरीय मदिरा और तेल के एम्फ़ोरा घड़े, और वहीं बने काँच और पत्थर के ढेरों मनके मिले, साथ में तमिल-ब्राह्मी अक्षरों वाले ठीकरे। विद्वान इसे पहली शताब्दी की यूनानी नौ-पुस्तिका ‘पेरिप्लस ऑफ़ द एरिथ्रियन सी’ में वर्णित मंडी पोदुके मानते हैं।

यह क्या सिद्ध करता है

यह दिखाता है कि तमिल तट रोम से सीधे व्यापार करता था, जैसा संगम कविताएँ यवन जहाज़ों के काली मिर्च के बदले सोना लाने का वर्णन करती हैं।

इनका प्रमाण