उत्खनित

पाटलिपुत्र

मगध, नन्दों, मौर्यों और गुप्तों की राजधानी, गंगा तट पर जहाँ कभी सोन मिलती थी। आज के पटना के नीचे वह काष्ठ-प्राचीर है जिसका वर्णन मेगस्थनीज़ ने किया, और मौर्यों का स्तम्भ-मण्डप।

निर्माण: अजातशत्रु ने दुर्ग बनाया, उदयिन ने राजधानी बनाया, 5वीं शताब्दी ई.पू.स्थान: बिहार25.60° N, 85.18° E
  1. 5वीं शताब्दी ई.पू.
  2. लगभग 321 ई.पू.
  3. 1541
  4. 1666
  5. 1912–15
चित्र: Manoj nav (talk) · Public domain

01पाटलिग्राम से राजधानी

महापरिनिब्बान सुत्त कहता है कि अपनी अन्तिम यात्रा में गंगा पार करते बुद्ध ने अजातशत्रु के मन्त्रियों को वज्जियों के विरुद्ध पाटलिग्राम में दुर्ग बनाते देखा और कहा कि यह एक महान नगर बनेगा। उदयिन राजधानी राजगृह से यहाँ ले आए। नन्दों ने यहीं से राज किया, और चाणक्य के मार्गदर्शन में चन्द्रगुप्त मौर्य ने इसे उनसे छीना। अशोक ने यहीं तीसरी बौद्ध संगीति बुलाई, और गुप्त युग में आर्यभट ने यहीं लिखा, जिसे वे आर्यभटीय में कुसुमपुर कहते हैं।

02मेगस्थनीज़ ने क्या देखा

लगभग 300 ई.पू. में चन्द्रगुप्त के दरबार में सेल्यूकस के दूत मेगस्थनीज़ ने लिखा कि पालिबोथ्रा नदी के किनारे लगभग 80 स्टेडिया लम्बा और 15 चौड़ा था, जिसे 570 बुर्जों और 64 द्वारों वाली लकड़ी की प्राचीर और गहरी खाई घेरती थी। 1920 के दशक में बुलन्दी बाग़ की खुदाई में साल की लकड़ी की उस प्राचीर की लम्बी पंक्तियाँ मिलीं। कुम्हरार में 1912–15 में डी. बी. स्पूनर ने और 1951–55 में काशी प्रसाद जायसवाल शोध संस्थान ने चमकदार बलुआ पत्थर के अस्सी स्तम्भों वाले मण्डप के अवशेष निकाले। 1541 में शेरशाह ने यहाँ क़िला बनवाया और उससे पटना नगर बढ़ा। 1666 में गुरु गोबिन्द सिंह का जन्म पटना में हुआ, जहाँ आज तख़्त श्री हरिमन्दिर साहिब है।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 5वीं शताब्दी ई.पू.अजातशत्रु पाटलिग्राम में दुर्ग बनाते हैं; बाद में उदयिन इसे राजधानी बनाते हैं।
  2. लगभग 321 ई.पू.चन्द्रगुप्त मौर्य नन्दों से पाटलिपुत्र लेते हैं।
  3. 1541शेरशाह क़िला बनवाता है और उसके चारों ओर पटना नगर बढ़ता है।
  4. 1666पटना में गुरु गोबिन्द सिंह का जन्म होता है।
  5. 1912–15स्पूनर कुम्हरार में मौर्य स्तम्भ-मण्डप का उत्खनन करते हैं।
दर्शन और यात्रा

पटना के कुम्हरार उद्यान में एक बचा स्तम्भ और मण्डप का नक़्शा है; बिहार संग्रहालय और पटना संग्रहालय में दीदारगंज यक्षी सहित मौर्य कालीन वस्तुएँ हैं।