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“जातक कथाओं में समुद्री यात्राएँ.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/samudra/jataka-sea-voyages/. देखा गया .
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Hindu History. (2026). जातक कथाओं में समुद्री यात्राएँ. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/samudra/jataka-sea-voyages/
इसकी पहचान
- 01
सुप्पारक जातक (संख्या 463): भरुकच्छ का अंधा नाविक
- 02
महाजनक जातक (संख्या 539): सुवर्णभूमि के मार्ग में जहाज़ का टूटना
- 03
बावेरु जातक (संख्या 339): बावेरु में बिका मोर
01भरुकच्छ का अंधा नाविक
सुप्पारक जातक भरुकच्छ, आज के भरूच, के एक कुशल नाविक की कथा है, जिसकी आँखें समुद्र के खारे छींटों से चली गई थीं। व्यापारी फिर भी उससे साथ चलने की विनती करते हैं। दूर समुद्र में जहाज़ ऐसे सागरों से गुज़रता है जिनका नाम नाविक नहीं जानते, और बूढ़ा नाविक पानी के रंग और चाल से हर एक को पहचानता है और जानता है कि कब लौटना है। कथा में नाविक का यह गर्व बचा है कि वह समुद्र को कंठस्थ जानता है।
02महाजनक और समुद्र की देवी
महाजनक जातक में विदेह का एक राजकुमार अपना खोया वैभव पाने के लिए चंपा से सुवर्णभूमि की ओर जहाज़ लेकर निकलता है। बीच समुद्र में जहाज़ टूट जाता है। वह शरीर पर तेल मलता है, मस्तूल से बँधता है और सात दिन तक बिना हार माने तैरता है, तब समुद्र की रक्षिका देवी मणिमेखला उसे उठाकर मिथिला पहुँचा देती है। मणिमेखला आज भी थाईलैंड और कंबोडिया की तटीय लोककथाओं में जानी जाती है।
03बावेरु के लिए मोर
बावेरु जातक में भारतीय व्यापारी बावेरु नाम के देश जाते हैं, जिसे बहुत से विद्वान बेबीलोन मानते हैं। पहले वे एक कौआ, जिसे वहाँ के लोगों ने कभी देखा ही नहीं था, सौ सिक्कों में बेचते हैं। अगली यात्रा में वे ताली पर नाचने वाला सधा हुआ मोर लाते हैं, जो हज़ार सिक्कों में बिकता है। इस हँसी के पीछे खाड़ी देशों से भारतीय जहाज़ों के व्यापार की स्मृति है।
ग्रन्थों में
- जातक, पालि त्रिपिटक (खुद्दक निकाय)

