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“मुज़िरिस पपाइरस.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/samudra/muziris-papyrus/. देखा गया .
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Hindu History. (2026). मुज़िरिस पपाइरस. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/samudra/muziris-papyrus/
इसकी पहचान
- 01
P. Vindob. G 40822, ऑस्ट्रियाई राष्ट्रीय पुस्तकालय, वियना
- 02
सामने: मुज़िरिस यात्रा का ऋण-अनुबंध
- 03
पीछे: हेरमापोलोन जहाज़ का माल
- 04
माल में गंगा क्षेत्र का नारदीन और हाथीदाँत
01एक सौदे के दो पक्ष
पत्र के सामने वाले भाग में एक ऋणदाता और एक व्यापारी के बीच अनुबंध का अंश है। इसमें लिखा है कि मुज़िरिस से लाया गया माल लाल सागर के तट से रेगिस्तान पार करके कोप्टोस तक और फिर नील नदी से अलेक्ज़ेंड्रिया तक कैसे पहुँचेगा, और ऋण न चुकाने पर क्या होगा। पीछे की ओर माल की सूची है, एक-एक वस्तु का वज़न और मूल्य, भारतीय आयात पर लगने वाले चौथाई कर को चुकाने के लिए। अधिकतर विद्वान दोनों लेखों को एक ही सौदा मानते हैं।
02हेरमापोलोन का माल
माल-सूची के पढ़े जा सकने वाले भाग में गंगा क्षेत्र का नारदीन (जटामांसी), हिमालय की एक सुगंधित वस्तु जो केरल तट तक बिकने आती थी, साबुत हाथीदाँत और हाथीदाँत के टुकड़े दर्ज हैं। इतिहासकार फ़ेदेरिको दे रोमानिस ने आँकड़ों का हिसाब लगाकर तर्क दिया कि जहाज़ पर 540 टन से अधिक काली मिर्च भी थी। एक ही जहाज़ का माल मिस्र में अपार धन के बराबर था, जिससे समझ आता है कि रोमन लेखक पूर्व की ओर बहते सोने से क्यों चिंतित थे।
03इसका महत्व
कविताएँ और भूगोलवेत्ता बताते हैं कि व्यापार होता था। यह पपाइरस उसका कागज़ी हिसाब दिखाता है: उधार, हानि के विरुद्ध सुरक्षा, सीमा पर चुंगी, और एक ही जहाज़ में केरल की काली मिर्च की भारी मात्रा। यह 1985 में प्रकाशित हुआ और तब से इसका गहन अध्ययन होता रहा है। यह ऑस्ट्रियाई राष्ट्रीय पुस्तकालय के पपाइरस संग्रह में रखा है।
ग्रन्थों में
- P. Vindob. G 40822 (यूनानी)

