01बालाजी विश्वनाथ और बाजीराव
कोंकण के चित्पावन ब्राह्मण बालाजी विश्वनाथ ने शाहू को गृहयुद्ध जिताया और 1713 में पेशवा बने। 1719 में वे दिल्ली गए और दक्कन के छह मुग़ल सूबों पर चौथ और सरदेशमुखी की बादशाही सनदें लेकर लौटे। उनके पुत्र बाजीराव प्रथम बीस वर्ष की आयु में पेशवा बने, लगभग चालीस अभियान लड़े, और कोई युद्ध न हारने के लिए याद किए जाते हैं। 1728 में पालखेड़ में उन्होंने निज़ाम को घेरकर झुकाया, 1729 में छत्रसाल बुन्देला को बचाया, 1737 में दिल्ली के छोर तक धावा किया, और भोपाल के पास फिर निज़ाम को घेरा। उनके भाई चिमाजी अप्पा ने 1739 में पुर्तगालियों से वसई छीनी। अप्रैल 1740 में नर्मदा तट पर रावेरखेड़ी में बाजीराव का देहान्त हुआ।
02नानासाहेब और पानीपत
बालाजी बाजीराव, जिन्हें नानासाहेब कहते हैं, ने इक्कीस वर्ष राज किया। पुणे बड़ा नगर बना, 1749 में पहाड़ी पर पर्वती मन्दिर खड़ा हुआ, और मराठा सेनाओं ने राजपूताना से बंगाल तक कर वसूला। 1758 में रघुनाथराव की सेना सिन्धु तट पर अटक पहुँची। फिर अफ़गानिस्तान से अहमदशाह अब्दाली उतरा। 14 जनवरी 1761 को पानीपत में सदाशिवराव भाऊ के नेतृत्व वाली मराठा सेना नष्ट हो गई; भाऊ और पेशवा के पुत्र विश्वासराव रणभूमि में खेत रहे, और हज़ारों सैनिक और साथ चलने वाले लोग मारे गए या बन्दी हुए। उसी जून नानासाहेब का देहान्त हुआ।

03माधवराव और पुनरुत्थान
माधवराव प्रथम सोलह वर्ष की आयु में पेशवा बने। 1763 में राक्षसभुवन में उन्होंने निज़ाम को हराया, मैसूर के हैदर अली को पीछे धकेला, और मराठा शक्ति लौटाने के लिए महादजी सिन्धिया आदि को उत्तर भेजा; 1771 तक मुग़ल बादशाह शाह आलम द्वितीय मराठा संरक्षण में दिल्ली में बैठा। 1772 में सत्ताईस वर्ष की आयु में थेऊर में क्षयरोग से माधवराव का देहान्त हुआ। 1773 में उनके भाई नारायणराव की शनिवारवाडा में हत्या हुई। फिर नाना फडणवीस और मन्त्रिमण्डल ने शिशु सवाई माधवराव के नाम पर राज चलाया, और 1779 में वडगाँव में अंग्रेज़ों को और 1795 में खर्डा में निज़ाम को हराया।
04बसई की सन्धि और पतन
अन्तिम पेशवा बाजीराव द्वितीय को 1802 में यशवन्तराव होलकर ने पुणे से खदेड़ा, और उन्होंने ईस्ट इण्डिया कम्पनी से बसई की सन्धि करके अंग्रेज़ी सहायक सेना स्वीकार की। इसी सन्धि से दूसरा आंग्ल-मराठा युद्ध छिड़ा। नवम्बर 1817 में वे अंग्रेज़ों के विरुद्ध उठे, खडकी और कोरेगाँव में हारे, और जून 1818 में जॉन मैल्कम के सामने समर्पण किया। उन्हें पेंशन देकर कानपुर के पास बिठूर भेज दिया गया, जहाँ उनके दत्तक पुत्र नाना साहब ने 1857 का झण्डा उठाया। पुणे में बचे उनके राज्य-अभिलेखागार, पेशवा दफ़्तर, में राजस्व, युद्ध और घरेलू हिसाब के कागज़ मोडी लिपि में सुरक्षित हैं।

शासक
- 1बालाजी विश्वनाथ1719 में दिल्ली से दक्कन की चौथ की सनदें1713–1720
- 2बाजीराव प्रथमपालखेड़, बुन्देलखण्ड, दिल्ली, भोपाल1720–1740
- 3बालाजी बाजीराव (नानासाहेब)मराठा विस्तार का शिखर; 1761 का पानीपत1740–1761
- 4माधवराव प्रथमपानीपत के बाद मराठा शक्ति फिर खड़ी की1761–1772
- 5नारायणरावशनिवारवाडा में हत्या1772–1773
- 6रघुनाथरावविवादित; अंग्रेज़ों की शरण गए1773–1774
- 7सवाई माधवरावउनके नाम पर नाना फडणवीस ने शासन चलाया1774–1795
- 8बाजीराव द्वितीयबसई की सन्धि; 1818 में समर्पण1796–1818
उनकी विरासत
- पुणे में पेशवाओं का महल शनिवारवाडा (1732)
- पुणे की पहाड़ी पर पर्वती मन्दिर (1749)
- नानासाहेब के समय बना त्र्यम्बकेश्वर का वर्तमान मन्दिर
- पेशवा दफ़्तर, मोडी लिपि का सबसे बड़ा अभिलेखागार
- उनके उठाए होलकर, सिन्धिया, गायकवाड़ और भोंसले घराने



































