011760 का धावा
कुंजपुरा करनाल के उत्तर में यमुना तट पर बसे अफ़ग़ान नवाबों के घराने के हाथ में था, जो अहमदशाह अब्दाली और नजीबुद्दौला के साथी थे। 1760 में अब्दाली ने यहाँ टुकड़ी और अनाज के भंडार रखे थे। अगस्त में दिल्ली ले चुके सदाशिवराव भाऊ उत्तर बढ़े, जबकि अब्दाली उफनती यमुना के उस पार अटका था। 17 अक्टूबर 1760 को मराठा तोपों ने दरार खोली और दुर्ग पर धावा हुआ। नवाब नजाबत ख़ाँ और अफ़ग़ान सरदार अब्दुस समद ख़ाँ मारे गए, और जनवरी में बुराड़ी घाट पर दत्ताजी शिंदे का सिर काटने वाले क़ुतुब शाह को मृत्युदंड मिला।
02पानीपत का रास्ता
कुंजपुरा के अनाज से मराठा शिविर का पेट भरा, पर इस जीत की क़ीमत भाऊ को अपनी स्थिति से चुकानी पड़ी। जब वे यहाँ रुके रहे, अक्टूबर के अंतिम दिनों में अब्दाली ने बागपत पर यमुना पार की और उनके पीछे उतरकर दिल्ली का रास्ता काट दिया। दोनों सेनाएँ कुछ ही पड़ाव दक्षिण पानीपत में मोर्चा बाँधकर बैठ गईं, और 14 जनवरी 1761 का युद्ध हुआ। कुंजपुरा का पुराना दुर्ग खंडहर है; गाँव अब अपने सैनिक स्कूल के लिए अधिक जाना जाता है।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 17 अक्टूबर 1760सदाशिवराव भाऊ कुंजपुरा पर धावा बोलते हैं।
- अक्टूबर 1760 का अंतअब्दाली मराठों के पीछे बागपत पर यमुना पार करता है।
- 14 जनवरी 1761पानीपत का तीसरा युद्ध।





