आज भी खड़ा

पुणे

वह नगर जहाँ जिजाबाई की देखरेख में शिवाजी बड़े हुए, और लगभग एक शताब्दी तक पेशवाओं की गद्दी, जहाँ से मराठा सेनाएँ अटक और बंगाल तक गईं। बाद में यही तिलक, आगरकर और डेक्कन एजुकेशन सोसायटी की कर्मभूमि बना।

निर्माण: मुळा–मुठा के तट का पुराना नगर; 1630 के दशक में शहाजी और जिजाबाई द्वारा फिर बसाया गया; 1730 से पेशवाओं की राजधानीस्थान: महाराष्ट्र18.52° N, 73.86° E
  1. लगभग 1630
  2. लगभग 1640
  3. 5 अप्रैल 1663
  4. 1730
  5. 1763
  6. अक्टूबर 1802
  7. 5–17 नवम्बर 1817
  8. 1828
  9. 22 फ़रवरी 1944
चित्र: Sachin More · CC BY-SA 4.0

01सोने का हल

पुणे शहाजी भोसले की जागीर में था। लगभग 1630 में आदिलशाही सरदार मुरार जगदेव ने नगर जला दिया और, जैसा मराठी बखरें बताती हैं, अभिशाप के रूप में इसकी भूमि पर गधों से हल चलवाया। कुछ वर्ष बाद जिजाबाई बालक शिवाजी और दादोजी कोंडदेव के साथ यहाँ आईं और उस अभिशाप को मिटाने के लिए सोने के हल से भूमि जुतवाई। उनके घर के पास कसबा गणपति की स्थापना हुई, और लगभग 1640 में शहाजी ने उनके लिए लाल महल बनवाया। यहीं से किशोर शिवाजी ने मावळ की घाटियाँ और उनके ऊपर के दुर्ग पहचाने। आज का लाल महल उसी स्थान पर बना आधुनिक पुनर्निर्माण है।

02पेशवाओं की गद्दी

5 अप्रैल 1663 की रात शिवाजी उसी लाल महल में घुसे जहाँ मुग़ल सेनापति शाइस्ता ख़ाँ डेरा डाले था; ख़ाँ तीन उँगलियाँ कटवाकर भागा। बाजीराव प्रथम ने पुणे को अपनी गद्दी बनाया तो यह मराठा शक्ति का केन्द्र हो गया; 1730 में शनिवारवाड़ा की नींव रखी गई। 1763 में निज़ाम की सेना ने नगर लूटा, और अक्टूबर 1802 में यशवन्तराव होलकर ने हडपसर में पेशवा और सिन्धिया को हराया। 5 नवम्बर 1817 को खडकी में अंग्रेज़ों की जीत के बाद 17 नवम्बर को शनिवारवाड़ा पर यूनियन जैक चढ़ा। 1880 के दशक में तिलक, चिपळूणकर और आगरकर ने यहीं न्यू इंग्लिश स्कूल, केसरी और फ़र्ग्युसन कॉलेज आरम्भ किए, और 1942–44 में अंग्रेज़ों ने गांधीजी को आग़ा ख़ाँ महल में बन्दी रखा, जहाँ कस्तूरबा का देहान्त हुआ।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. लगभग 1630आदिलशाही सरदार मुरार जगदेव पुणे को जलाता है।
  2. लगभग 1640शहाजी जिजाबाई और शिवाजी के लिए लाल महल बनवाते हैं; नगर फिर बसता है।
  3. 5 अप्रैल 1663लाल महल में शाइस्ता ख़ाँ पर शिवाजी का रात्रि-आक्रमण।
  4. 1730बाजीराव प्रथम शनिवारवाड़ा की नींव रखते हैं; पुणे पेशवाओं की राजधानी बनता है।
  5. 1763निज़ाम की सेना पुणे को लूटती है; उसी वर्ष राक्षसभुवन में मराठे उत्तर देते हैं।
  6. अक्टूबर 1802यशवन्तराव होलकर हडपसर में पेशवा और सिन्धिया को हराते हैं; बाजीराव द्वितीय भागकर बसई की सन्धि करता है।
  7. 5–17 नवम्बर 1817खडकी का युद्ध; अंग्रेज़ पुणे पर अधिकार कर शनिवारवाड़ा पर अपना झण्डा फहराते हैं।
  8. 1828भीषण आग कई दिन शनिवारवाड़ा को जलाती है; केवल दीवारें और द्वार बचते हैं।
  9. 22 फ़रवरी 1944आग़ा ख़ाँ महल में अंग्रेज़ों की हिरासत में कस्तूरबा गांधी का देहान्त।
दर्शन और यात्रा

शनिवारवाड़ा, लाल महल और कसबा गणपति पुराने नगर में पास-पास हैं। सिंहगढ़ 35 किमी दक्षिण-पश्चिम में है।