1753 का दिल्ली गृहयुद्ध

विजेताबादशाह अहमदशाह का दरबारी दलइमाद-उल-मुल्क; नजीब ख़ान रुहेला; इंतज़ाम-उद-दौला
1753 ई.बनाम
पदच्युत वज़ीर और जाटसफ़दर जंग; सूरजमल

बादशाह ने अपने वज़ीर सफ़दर जंग को हटाया, पर वह नहीं गया और आठ महीने तक दिल्ली की गलियों और उपनगरों में दरबार से लड़ता रहा। इस अफ़रा-तफ़री में जाटों ने पुरानी दिल्ली लूटी।

तिथि: मार्च–नवंबर 1753 ई.स्थान: दिल्ली और उसके उपनगरप्रकार: युद्ध
चित्र: Bornav27may · CC BY-SA 3.0
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“1753 का दिल्ली गृहयुद्ध.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/battles/delhi-civil-war-1753/. देखा गया .

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Hindu History. (2026). 1753 का दिल्ली गृहयुद्ध. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/battles/delhi-civil-war-1753/

परिणाम

राजधानी और उसके आसपास महीनों की लड़ाई के बाद सफ़दर जंग ने हार मानी और नवंबर 1753 में अवध लौट गया।

01वज़ीर की बर्ख़ास्तगी

1748 से वज़ीर रहे अवध के नवाब सफ़दर जंग ने बादशाह और तूरानी अमीरों को शत्रु बना लिया था। मार्च 1753 में वह रुष्ट होकर राजधानी छोड़ गया, बर्ख़ास्त हुआ, और दीवारों के बाहर डेरा डाल दिया। पहले निज़ाम के पौत्र युवा इमाद-उल-मुल्क ने दरबारी दल का नेतृत्व किया और नजीब ख़ान के रुहेलों को बुलाया। सफ़दर जंग ने एक युवक को प्रतिद्वंद्वी बादशाह के रूप में गद्दी पर बिठाया और सूरजमल के जाटों को बुला लिया।

02आठ महीने की लड़ाई

वसंत से शरद तक दोनों पक्ष पुराने क़िले, पुरानी दिल्ली और उपनगरों के आसपास लड़ते रहे। मई में जाटों ने पुरानी बस्ती और बाहरी मोहल्लों को लूटा, जिसे दिल्ली बहुत समय तक याद करती रही। कोई पक्ष पूरी तरह न जीत सका। इमाद-उल-मुल्क ने मराठों से सहायता माँगी, और जयपुर के राजा माधो सिंह ने संधि करवाई। नवंबर 1753 में सफ़दर जंग अवध चला गया; प्रांत उसके पास रहा पर वज़ीरी गई, और अगले वर्ष उसकी मृत्यु हुई।

भरतपुर के जाट
राजवंश · 1722–1948 ई. (जाट प्रतिरोध 1669 से)भरतपुर के जाट1669 में गोकुला के नेतृत्व में ब्रज के जाट किसान मुग़लों के विरुद्ध उठे, और उसी लम्बे विद्रोह से बदनसिंह और उनके पुत्र सूरजमल ने डीग और भरतपुर को राजधानी बनाकर राज्य खड़ा किया। भरतपुर के मिट्टी की दीवारों वाले लोहागढ़ ने 1805 में अंग्रेज़ी सेना को चार बार लौटाया।पढ़ें →
महत्त्व

इस युद्ध ने गद्दी इमाद-उल-मुल्क के हाथ सौंप दी और दिल्ली की राजनीति मराठों, जाटों और रुहेलों, सबके लिए खोल दी।