01इन्द्रप्रस्थ
महाभारत कहता है कि धृतराष्ट्र ने आधे राज्य के रूप में पाण्डवों को ऊबड़-खाबड़ खाण्डव प्रदेश दिया। श्रीकृष्ण और अर्जुन ने खाण्डव वन साफ़ किया, असुर शिल्पी मय ने वह सभा बनाई जिसकी फ़र्श पानी जैसी दिखती थी, और युधिष्ठिर ने वहाँ राजसूय यज्ञ किया। दिल्ली की परम्परा सदा इन्द्रप्रस्थ को पुराने क़िले के टीले पर रखती आई है, जहाँ परकोटे के भीतर इन्दरपत नाम का गाँव बीसवीं शताब्दी तक बसा रहा। बी. बी. लाल को 1950 के दशक में और 1969–73 में वहाँ चित्रित धूसर मृद्भाण्ड मिले, और 2013–14, 2017–18 तथा 2022–23 के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के उत्खनन में मौर्य काल से मुग़ल काल तक की अटूट परतें मिलीं।
02तोमरों और चौहानों की ढिल्लिका
ढिल्लिका नाम तोमर राजपूतों के साथ मिलता है। अनंगपाल तोमर ने ग्यारहवीं शताब्दी में महरौली में लालकोट का परकोटा बनवाया; लौह-स्तम्भ पर खुदी एक छोटी पंक्ति, जिसे ‘संवत 1109 अंगपाल बहि’ पढ़ा जाता है, 1052 ई. मानी जाती है। वह स्तम्भ दिल्ली की किसी भी दीवार से पुराना है। उस पर चन्द्र नामक राजा का गुप्तकालीन अभिलेख है और वह कभी कहीं और एक विष्णु मन्दिर के सामने खड़ा था। बारहवीं शताब्दी के मध्य चाहमानों ने दिल्ली ली, और पृथ्वीराज तृतीय ने परकोटा बढ़ाकर क़िला राय पिथौरा बनाया। 1192 में तराइन में उनकी हार के बाद नगर गिरा, और उसके मन्दिर तोड़कर क़ुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद बनी।
03लूटी गई, थामी गई, फिर जीती गई
दिसम्बर 1398 में तैमूर ने और मार्च 1739 में नादिरशाह ने दिल्ली लूटी; नादिरशाह के समय एक ही दिन में हज़ारों लोग मारे गए। बीच में सूर वंश के सेनापति हेमू ने अक्टूबर 1556 में तुग़लक़ाबाद का युद्ध जीता और दिल्ली में विक्रमादित्य के रूप में राज्याभिषेक कराया, पर एक माह बाद पानीपत में गिर गए। मराठे 1757 में दिल्ली पहुँचे, और 1771 में महादजी शिन्दे मुग़ल बादशाह शाह आलम द्वितीय को मराठा संरक्षण में दिल्ली लौटा लाए। अंग्रेज़ों ने 1803 में इसे लिया, मई 1857 में खोया और उसी सितम्बर फिर लिया। 15 अगस्त 1947 को दिल्ली स्वतन्त्र भारत की राजधानी बनी।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- लगभग 1052 (संवत 1109)अनंगपाल तोमर लालकोट बनवाते हैं; तिथि लौह-स्तम्भ की एक पंक्ति से पढ़ी जाती है।
- 1164 (संवत 1220)चाहमान विग्रहराज चतुर्थ अशोक स्तम्भ (आज दिल्ली-टोपरा) पर अपना अभिलेख जोड़ते हैं, जिसमें हिमालय तक अपने राज्य का उल्लेख है।
- 1192तराइन के दूसरे युद्ध के बाद दिल्ली क़ुतुबुद्दीन ऐबक के नेतृत्व में ग़ोरी सेना के हाथ जाती है।
- दिसम्बर 1398तैमूर दिल्ली लूटता है और जनसंहार करता है।
- अक्टूबर 1556हेमू तुग़लक़ाबाद में जीतकर दिल्ली में विक्रमादित्य के रूप में अभिषिक्त होते हैं।
- मार्च 1739नादिरशाह दिल्ली लूटता है और मयूर सिंहासन ले जाता है।
- 1771महादजी शिन्दे मराठा संरक्षण में शाह आलम द्वितीय को दिल्ली लौटाते हैं।
- मई–सितम्बर 1857मेरठ के सिपाही दिल्ली ले लेते हैं; अंग्रेज़ लम्बी घेराबन्दी के बाद उसे फिर लेते हैं।
- 15 अगस्त 1947दिल्ली स्वतन्त्र भारत की राजधानी बनती है।
पुराने क़िले के टीले और उसके संग्रहालय से आरम्भ करें, फिर दक्षिण में महरौली जाकर लौह-स्तम्भ और लालकोट की दीवारें देखें। राष्ट्रीय संग्रहालय में हड़प्पा और गुप्त दीर्घाएँ हैं।














