चित्र: Bornav27may · CC BY-SA 3.0
शासक

महाराजा सूरजमल

भरतपुर के जाट राजा

1707 ई.—1763 ई.

1707–1763 ई.; शासन 1755–1763

बदन सिंह के पुत्र सूरजमल ने भरतपुर का मिट्टी की दीवारों वाला वह किला बनाया जिसे कोई सेना कभी नहीं तोड़ पाई, चंबल से दिल्ली के छोर तक राज किया और 1761 में आगरा का किला लिया। 25 दिसंबर 1763 को हिंडन के पास एक घात में वे मारे गए।

01मिट्टी का किला

भरतपुर 1730 के दशक से बना, जब उनके पिता अभी डीग से राज करते थे। निर्माण का काम सूरजमल ने सँभाला। गहरी खाई के पीछे दबाई हुई मिट्टी की मोटी दीवारें थीं; तोप के गोले उन्हें तोड़ने के बजाय उनमें धँस जाते थे। 1754 में मुग़ल साथियों वाली एक मराठा सेना ने उन्हें महीनों कुम्हेर में घेरे रखा, और मल्हारराव होल्कर के पुत्र खंडेराव वहाँ की दीवारों से चली गोली से मारे गए। संधि हुई और किला खड़ा रहा। आधी सदी बाद इन्हीं दीवारों ने 1805 में जनरल लेक के चार धावे लौटा दिए।

02पानीपत और आगरा

1760 में जब सदाशिवराव भाऊ अहमदशाह अब्दाली के विरुद्ध उत्तर आए, तो सूरजमल उनके साथ दिल्ली तक गए, फिर युद्ध की रीति पर मतभेद होने पर शिविर से अलग हो गए। जनवरी 1761 में पानीपत की हार के बाद भूखे मराठा सैनिक जाट प्रदेश पहुँचे, तो सूरजमल और उनकी रानी किशोरी ने उन्हें भोजन और वस्त्र देकर दक्षिण की ओर विदा किया। जून 1761 में उन्होंने मुग़ल चौकी से आगरा का किला ले लिया। डीग में उन्होंने वे महल और जल-उद्यान बनवाए जो आज भी खड़े हैं।

दिल्ली (इन्द्रप्रस्थ)
स्थान · पाण्डवों का इन्द्रप्रस्थ; लगभग 1052 में तोमर अनंगपाल का लालकोट; उसके बाद अनेक नगरदिल्ली (इन्द्रप्रस्थ)पाण्डवों का इन्द्रप्रस्थ यमुना-तट पर वहाँ था जहाँ आज पुराना क़िला है, और तोमरों तथा चौहानों ने महरौली में पहली परकोटे वाली दिल्ली बसाई। तब से इसी भूमि पर सात या अधिक नगर उठे।पढ़ें →