उज्जैन का युद्ध (1801)

विजेताइंदौर के होलकरयशवंतराव होलकर
1801 ई.बनाम
दौलतराव सिंधिया की सेनाजॉन हेसिंग की पलटनें

मालवा के दो बड़े घरानों के वैर में यशवंतराव होलकर ने सिंधिया की राजधानी उज्जैन पर धावा किया और उसकी रक्षा को भेजी पलटनों को हरा दिया।

तिथि: जुलाई 1801 ई.स्थान: उज्जैन, मालवा, मध्य प्रदेशप्रकार: युद्ध
चित्र: Unknown author · Public domain
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“उज्जैन का युद्ध (1801).” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-ujjain-1801/. देखा गया .

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Hindu History. (2026). उज्जैन का युद्ध (1801). प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-ujjain-1801/

परिणाम

यशवंतराव ने सिंधिया की पलटनों को तितर-बितर कर दिया और सिंधिया की राजधानी उज्जैन से भारी धन वसूला।

01होलकर बनाम सिंधिया

1797 में तुकोजी होलकर की मृत्यु के बाद दौलतराव सिंधिया ने होलकर उत्तराधिकार में दख़ल दिया और यशवंतराव के भाई मल्हारराव की हत्या करवा दी। यशवंतराव ने, जिसके पास अपनी तलवार के अतिरिक्त कोई सेना न थी, पिंडारी और भील घुड़सवार तथा पठान सैनिक जुटाए और प्रतिशोध के लिए निकल पड़ा। 1801 की गर्मियों में, जब सिंधिया अभी दक्कन में था, उसने उज्जैन पर प्रहार किया, क्षिप्रा तट की वह महाकाल नगरी जिसे महादजी ने अपने घराने का केंद्र बनाया था।

02उज्जैन से वसूली

डच मूल के अफ़सर जॉन हेसिंग के अधीन सिंधिया की पलटनें उसका सामना करने निकलीं और टूट गईं, अपनी तोपें गँवा बैठीं। यशवंतराव नगर में घुसा, नागरिकों से बड़ी रक़म वसूली और नगर को बख़्श दिया। मैल्कम लिखता है कि उसने नगर नहीं लूटा। इस विजय से यशवंतराव के डेरे में नए सैनिक उमड़ पड़े। सिंधिया का उत्तर कुछ ही महीनों में आया: उसका सेनापति सर्जेराव घाटगे इंदौर पर चढ़ आया।

ग्वालियर के सिन्धिया (शिन्दे)
राजवंश · 1731–1948 ई.ग्वालियर के सिन्धिया (शिन्दे)रानोजी शिन्दे बाजीराव प्रथम के अधीन सेनानायक के रूप में उभरे और उन्हें उत्तरी मालवा मिला। पानीपत से बच निकले उनके पुत्र महादजी दिल्ली के स्वामी और 1780 के दशक के सबसे शक्तिशाली भारतीय शासक बने; यही घराना आगे 1948 तक ग्वालियर पर राज करता रहा।पढ़ें →
महत्त्व

होलकर–सिंधिया युद्ध ने मराठा संघ को ठीक उस समय बाँट दिया जब कंपनी उससे निपटने की तैयारी कर रही थी।