01रानोजी से पानीपत तक
रानोजी शिन्दे ने बाजीराव के अंगरक्षक दल से आरम्भ किया और मालवा में उनके घुड़सवारों के नायक बने। उज्जैन उनके हाथ रहा, और उनके दीवान रामचन्द्र बाबा शेणवी ने महाकालेश्वर मन्दिर फिर से बनवाया, जो 1234 में इल्तुतमिश के आक्रमण के बाद से खण्डहर पड़ा था। रानोजी के पुत्रों में जयप्पा 1755 में मारवाड़ में मारे गए, दत्ताजी जनवरी 1760 में बुराड़ी घाट पर अफ़गानों से लड़ते हुए खेत रहे, और जनकोजी एक वर्ष बाद पानीपत में पकड़े जाकर मारे गए। सबसे छोटे महादजी उस भगदड़ में घायल होकर लँगड़े हुए और बच निकले।
02दिल्ली में महादजी
1772 में महादजी सिन्धिया मुग़ल बादशाह शाह आलम द्वितीय को मराठा संरक्षण में दिल्ली लौटा लाए। 1779 में वडगाँव में उन्होंने अंग्रेज़ी टुकड़ी से समर्पण करवाया और 1782 की सालबाई सन्धि करवाई, जिससे पहला आंग्ल-मराठा युद्ध समाप्त हुआ। 1784 में बादशाह ने पेशवा को वकील-उल-मुतलक, अर्थात साम्राज्य का संरक्षक, बनाया और महादजी को उनका नायब, जिनके हाथ दिल्ली की वास्तविक सत्ता रही। मराठा वृत्तान्त यह भी कहते हैं कि उनके कहने पर बादशाह ने गोवध पर रोक लगाई। सावॉय के अफ़सर बेनुआ द बोइन की प्रशिक्षित ब्रिगेडों के बल पर उन्होंने 1790 में पाटन और मेड़ता में राजपूतों को हराया। फ़रवरी 1794 में पुणे के पास उनका देहान्त हुआ।

03असई से 1858 तक
1803 में दौलतराव सिन्धिया असई में आर्थर वेलेज़ली से और लासवारी में जेरार्ड लेक से हारे, और सुर्जी-अंजनगाँव की सन्धि में दिल्ली, आगरा और चम्बल के उत्तर की भूमि छिन गई। 1810 में उन्होंने ग्वालियर किले के नीचे अपनी छावनी को राजधानी बनाया, और वह छावनी-नगर आज भी लश्कर कहलाता है। 1843 में अंग्रेज़ी सेना ने महाराजपुर और पनियार में ग्वालियर की सेना को हराया। जून 1858 में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर लिया; जयाजीराव आगरा भाग गए, और 18 जून को नगर के बाहर रानी युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुईं।
शासक
- 1रानोजीसंस्थापक; उज्जैन उनके हाथ1731–1745
- 2जयप्पा1745–1755
- 3जनकोजीपानीपत के बाद पकड़े जाकर मारे गए1755–1761
- 4महादजी1784 से मुग़ल साम्राज्य के संरक्षक1768–1794
- 5दौलतरावअसई और लासवारी में हार; ग्वालियर आए1794–1827
- 6जनकोजीराव द्वितीय1827–1843
- 7जयाजीरावजयविलास महल बनवाया1843–1886
- 8माधवराव1886–1925
- 9जीवाजीरावविलय; मध्य भारत के राजप्रमुख1925–1948
उनकी विरासत
- उज्जैन का फिर से बना महाकालेश्वर मन्दिर
- ग्वालियर किले के नीचे बसा छावनी-नगर लश्कर
- ग्वालियर का जयविलास महल (1874)
- पुणे के वानवडी में महादजी की छत्री











