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“माता सरस्वती.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/devata/saraswati/. देखा गया .
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Hindu History. (2026). माता सरस्वती. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/devata/saraswati/
पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती। यज्ञं वष्टु धियावसुः॥
pāvakā naḥ sarasvatī vājebhir vājinīvatī | yajñaṃ vaṣṭu dhiyāvasuḥ ||
गौरवर्णा, श्वेत वस्त्रों में, श्वेत कमल या जल के किनारे शिला पर बैठी, चार भुजाएँ: दो से वीणा बजाती, बाकी दो में पुस्तक और अक्षमाला। पास में हंस, कभी-कभी मयूर।
01नदी और वाणी
ऋग्वेद में सरस्वती पहले एक नदी हैं, माताओं में श्रेष्ठ, नदियों में श्रेष्ठ, देवियों में श्रेष्ठ (अम्बितमे नदीतमे देवितमे सरस्वति, ऋग्वेद 2.41.16)। वही सूक्त उन्हें पवित्र करने वाली, शुभ विचार जगाने वाली और हर प्रार्थना को प्रकाशित करने वाली कहते हैं (ऋग्वेद 1.3.10–12)। ब्राह्मण ग्रन्थ उन्हें वाक्, स्वयं वाणी, से जोड़ते हैं। पुराणों तक आते-आते वे ब्रह्मा की शक्ति हैं, जिनके द्वारा वे शब्द से सृष्टि करते हैं, और वह देवी हैं जिन्हें हर विद्यार्थी पुस्तक खोलने से पहले प्रणाम करता है।
02वसन्त पंचमी और पहला अक्षर
माघ शुक्ल पंचमी, वसन्त पंचमी, को पीले वस्त्रों में उनकी पूजा होती है; बंगाल के हर विद्यालय और महाविद्यालय में उनकी मूर्ति बैठती है, और उस दिन बच्चे पढ़ते नहीं, क्योंकि पुस्तकें देवी के आसन पर रखी होती हैं। दक्षिण में सरस्वती पूजा नवरात्रि में होती है, जब पुस्तकें, वाद्य और औज़ार उनके सामने रखे जाते हैं। विजयादशमी को छोटे बच्चे चावल की थाली में अपना पहला अक्षर लिखते हैं (केरल में विद्यारम्भम्, आन्ध्र और तेलंगाना में अक्षराभ्यासम्)।
03शारदा पीठ, शृंगेरी, बासर
कश्मीर में किशनगंगा के किनारे शारदा पीठ कभी विद्या का बड़ा केन्द्र था; शंकर दिग्विजय कहता है कि आदि शंकराचार्य वहाँ सर्वज्ञ पीठ पर आरूढ़ हुए। आज वह नियन्त्रण रेखा के उस पार है। शंकराचार्य ने तुंगा के किनारे शृंगेरी में शारदाम्बा की स्थापना की, जहाँ मठ ने उनकी पूजा बिना टूटे जारी रखी है। तेलंगाना में गोदावरी के किनारे बासर की ज्ञान सरस्वती के यहाँ परिवार बच्चों को पहला अक्षर लिखाने लाते हैं। धार में राजा भोज की भोजशाला ग्यारहवीं शताब्दी में वाग्देवी के लिए बनी थी।
ग्रन्थों में
- ऋग्वेद 1.3.10–12 और 2.41.16–18
- देवी भागवत पुराण
- शंकर दिग्विजय (शारदा पीठ)












