राजा सुख जीवन मल का पतन: कश्मीर पर दुर्रानी पुनराधिकार

सुख जीवन मल के अधीन कश्मीर राज्यराजा सुख जीवन मल
1762 ई.बनाम
विजेतादुर्रानी सेनाअहमद शाह अब्दाली की ओर से नूरुद्दीन बामज़ई

आठ वर्ष तक एक पंजाबी खत्री, सुख जीवन मल, काबुल से स्वतंत्र होकर कश्मीर पर राज करता रहा। 1762 में अब्दाली की तीसरी सेना घाटी पहुँची, और सुख जीवन के अपने सेनापति ने उसे धोखा दिया।

तिथि: 1762 ई.स्थान: कश्मीर घाटी, श्रीनगर के आसपासप्रकार: अभियान
चित्र: Hasan al-Din · Public domain
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“राजा सुख जीवन मल का पतन: कश्मीर पर दुर्रानी पुनराधिकार.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/battles/durrani-reconquest-of-kashmir-1762/. देखा गया .

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Hindu History. (2026). राजा सुख जीवन मल का पतन: कश्मीर पर दुर्रानी पुनराधिकार. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/battles/durrani-reconquest-of-kashmir-1762/

परिणाम

अपने सेनापति के विश्वासघात से सुख जीवन मल पकड़ा गया, अंधा किया गया और लाहौर में मार डाला गया, और कश्मीर फिर अफ़ग़ान शासन में चला गया।

01स्वतंत्रता के आठ वर्ष

1752 में अब्दाली ने कश्मीर लिया और उसके सूबेदारों ने कठोरता से शासन किया। अफ़ग़ान सेवा में आगे बढ़ा सुख जीवन मल सूबेदार अब्दुल्ला ख़ान काबुली का मुख्य सलाहकार बना। कश्मीरी अमीर अबुल हसन बांडे के कहने पर उसने काबुली को मरवाया और सत्ता ली, और मुग़ल बादशाह से राजा की उपाधि पाई। उसने दो अफ़ग़ान अभियानों को लौटा दिया। 1755 में अकाल पड़ा तो उसने राजकीय भंडार से अन्न बँटवाया, और दरबार में कवियों को जुटाकर कश्मीर का इतिहास नए सिरे से लिखवाया।

02विश्वासघात

बल विफल हुआ तो अब्दाली ने राजा के मित्रों को फोड़ा। सुख जीवन का बांडे से मनमुटाव हो गया, और 1762 में, अब्दाली के छठे आक्रमण के वर्ष, नूरुद्दीन बामज़ई अफ़ग़ान सेना लेकर दर्रे पार आया। राजा की सेना का बड़ा भाग आक्रमणकारियों से जा मिला, और उसका प्रधान सेनापति बख़्त मल उसे छोड़ गया। सुख जीवन पकड़ा गया, अंधा किया गया और लाहौर में अब्दाली के पास भेजा गया, जहाँ उसे मार डाला गया। 1819 में महाराजा रणजीत सिंह की सेना के आने तक कश्मीर अफ़ग़ान सूबेदारों के अधीन रहा।

महत्त्व

सुख जीवन मल को डोगरों से पहले स्वतंत्र कश्मीर के अंतिम हिंदू राजा के रूप में स्मरण किया जाता है। उसके बाद का अफ़ग़ान शासन घाटी के सबसे कठोर शासनों में था।