01किलों से स्वराज्य
किशोर अवस्था में, 1640 के दशक में, शिवाजी ने तोरणा लिया और साथ की पहाड़ी पर राजगड बनाया, जो लगभग पच्चीस वर्ष उनकी राजधानी रहा। 1659 में प्रतापगड के नीचे उन्होंने बीजापुर के सेनापति अफ़ज़ल ख़ान को मारा और उसकी सेना नष्ट की। 1663 में पुणे के लाल महल में शाइस्ता ख़ान पर छापा पड़ा, और 1664 में सूरत लूटा गया। 1665 की पुरन्दर सन्धि में तेईस किले देने पड़े, और 1666 में आगरा जाने पर नज़रबन्दी हुई, जिससे वे मिठाई की टोकरी में छिपकर निकले। 1670 तक सिंहगड, जहाँ तानाजी मालुसरे वीरगति को प्राप्त हुए, और अधिकांश किले लौट आए।
02रायगड का राज्याभिषेक
6 जून 1674 को काशी के गागा भट्ट ने रायगड पर वैदिक अभिषेक किया और शिवाजी छत्रपति बने। उसी दिन से राज्याभिषेक शक नाम का नया संवत चला। वे आठ मन्त्रियों की परिषद, अष्टप्रधान, के सहारे राज चलाते थे, सैनिकों को जागीर के बदले नकद वेतन देते थे, और उन्होंने राजकाज के फ़ारसी शब्दों के संस्कृत पर्याय का कोश, राजव्यवहारकोश, तैयार करवाया। उन्होंने नौसेना खड़ी की और मालवण के सामने सिन्धुदुर्ग जैसे सागरी किले बनवाए। 1677–78 के दक्षिण अभियान में जिंजी और वेल्लोर लिए गए। अप्रैल 1680 में रायगड पर उनका देहान्त हुआ।

03सत्ताईस वर्ष का युद्ध
औरंगज़ेब 1681 में स्वयं दक्षिण आया और फिर कभी लौटा नहीं। सम्भाजी आठ वर्ष उससे लड़े, फ़रवरी 1689 में संगमेश्वर में पकड़े गए, और बादशाह के आदेश पर यातना देकर मार्च 1689 में तुळापुर में उनका वध किया गया। उसी वर्ष रायगड छिन गया। राजाराम निकलकर जिंजी पहुँचे, जिसे मुग़ल 1698 तक घेरे रहे, और इधर सन्ताजी घोरपडे और धनाजी जाधव दक्कन भर में बादशाही सेनाओं को थकाते रहे। 1700 में सिंहगड पर राजाराम के देहान्त के बाद उनकी विधवा ताराबाई ने पुत्र शिवाजी द्वितीय के नाम से युद्ध चलाया। 1707 में अहमदनगर में औरंगज़ेब मरा, और मराठे तब भी रणभूमि में डटे थे।
04सातारा, कोल्हापुर और अन्त
1707 में मुग़लों ने सम्भाजी के पुत्र शाहू को छोड़ा। उन्होंने खेड़ में ताराबाई की सेना को हराया, सातारा से राज किया, और 1713 में बालाजी विश्वनाथ को पेशवा बनाया; तब से छत्रपति के नाम पर असली सत्ता पेशवाओं के हाथ रही। ताराबाई की शाखा ने कोल्हापुर में अलग गद्दी बनाई, और 1731 की वारणा सन्धि ने दोनों घरानों की सीमा तय की। 1818 में पेशवाई गिरने के बाद अंग्रेज़ों ने सातारा में प्रतापसिंह को गद्दी दी, 1839 में उन्हें हटाया, और 1848 में शाहजी के निस्सन्तान मरने पर राज्य अपने में मिला लिया। कोल्हापुर 1949 तक रियासत बना रहा।

शासक
- 1शिवाजी6 जून 1674 को रायगड पर छत्रपति1674–1680
- 2सम्भाजीसंगमेश्वर में पकड़े गए, तुळापुर में वध1681–1689
- 3राजारामजिंजी से युद्ध चलाया1689–1700
- 4शिवाजी द्वितीय (ताराबाई संरक्षिका)ताराबाई ने औरंगज़ेब से युद्ध चलाया1700–1707
- 5शाहू प्रथमसातारा से राज; पेशवा नियुक्त किए1707–1749
- 6राजाराम द्वितीय1749–1777
- 7शाहू द्वितीय1777–1808
- 8प्रतापसिंह1818 में अंग्रेज़ों ने बिठाया, 1839 में हटाया1808–1839
- 9शाहजी (अप्पासाहेब)उनके बाद सातारा का विलय1839–1848
उनकी विरासत
- रायगड, राजगड, तोरणा, सिंहगड और प्रतापगड के पहाड़ी किले
- सिन्धुदुर्ग और विजयदुर्ग के सागरी किले, और मराठा नौसेना
- अष्टप्रधान परिषद और राजव्यवहारकोश
- 1674 से गिना जाने वाला राज्याभिषेक शक
- ऐसा राज्य जो औरंगज़ेब के बाद भी टिका और मराठा साम्राज्य बना



































