प्रतापगढ़ का युद्ध

विजेताशिवाजी महाराज के मराठेशिवाजी महाराज
1659 ई.बनाम
पक्षबीजापुर सल्तनतअफ़ज़ल ख़ाँ

बीजापुर ने शिवाजी महाराज को कुचलने के लिए अपने वरिष्ठ सेनापति अफ़ज़ल ख़ाँ को भेजा। शिवाजी महाराज उसे जावली के जंगलों में ले आए और प्रतापगढ़ के नीचे अकेले मिलने को राज़ी हुए।

तिथि: 10 नवम्बर 1659 ई.स्थान: प्रतापगढ़ दुर्ग के नीचे, सातारा ज़िला, महाराष्ट्रप्रकार: युद्ध
चित्र: https://archive.org/details/indianhistorical00rawl/page/n155 · Public domain
परिणाम

भेंट में शिवाजी महाराज ने अफ़ज़ल ख़ाँ को मार डाला और मराठा सैनिकों ने नीचे के जंगल में बीजापुरी सेना को तितर-बितर कर दिया।

01अफ़ज़ल ख़ाँ का अभियान

मराठा बखरें दर्ज करती हैं कि रास्ते में अफ़ज़ल ख़ाँ ने तुळजापुर में तुळजा भवानी के मन्दिर और पंढरपुर के मन्दिर को अपवित्र किया। शिवाजी महाराज ने खुले मैदान में मिलने से मना किया और जावली के घने जंगल में प्रतापगढ़ पर रहे। अफ़ज़ल ख़ाँ की सेना को सँकरी घाटियों से ऊपर आना पड़ा, जहाँ उसकी तोपें और हाथी काम के न थे। भेंट की शर्तें तय हुईं: दोनों एक-एक सेवक के साथ आएँगे और कुछ रक्षक दूर खड़े रहेंगे।

02आलिंगन

शिवाजी महाराज वस्त्रों के नीचे कवच पहनकर, हाथ में बाघनख और बिछुआ लेकर आए। सभासद बखर कहती है कि उनसे बहुत ऊँचे अफ़ज़ल ख़ाँ ने उन्हें आलिंगन में लेकर सिर बगल में दबाया और कटार से वार किया, जो कवच पर फिसल गई। शिवाजी महाराज ने बाघनख और बिछुए से उसे चीर डाला। अफ़ज़ल ख़ाँ के अंगरक्षक सैयद बंडा ने आक्रमण किया तो जीवा महाला ने उसे काट गिराया। संकेत मिलते ही जंगल में छिपे मराठा सैनिक बीजापुरी शिविर पर टूट पड़े।

छत्रपति शिवाजी महाराज
व्यक्तित्व · 1630–1680 ई.; राज्याभिषेक 1674छत्रपति शिवाजी महाराज19 फ़रवरी 1630 को शिवनेरी में जन्मे शिवाजी ने पुणे के आसपास के मुट्ठी भर पहाड़ी दुर्गों से स्वतंत्र मराठा राज्य खड़ा किया, बीजापुर और मुग़लों को मात दी, औरंगज़ेब के दरबार से निकल आए, और 6 जून 1674 को रायगढ़ पर छत्रपति के रूप में अभिषिक्त हुए।पढ़ें →
महत्त्व

प्रतापगढ़ से पूरे दक्कन में शिवाजी महाराज का नाम हुआ और नवोदित स्वराज्य को एक पूरी सेना की तोपें, घोड़े और ख़ज़ाना मिला।