भेंट में शिवाजी महाराज ने अफ़ज़ल ख़ाँ को मार डाला और मराठा सैनिकों ने नीचे के जंगल में बीजापुरी सेना को तितर-बितर कर दिया।
01अफ़ज़ल ख़ाँ का अभियान
मराठा बखरें दर्ज करती हैं कि रास्ते में अफ़ज़ल ख़ाँ ने तुळजापुर में तुळजा भवानी के मन्दिर और पंढरपुर के मन्दिर को अपवित्र किया। शिवाजी महाराज ने खुले मैदान में मिलने से मना किया और जावली के घने जंगल में प्रतापगढ़ पर रहे। अफ़ज़ल ख़ाँ की सेना को सँकरी घाटियों से ऊपर आना पड़ा, जहाँ उसकी तोपें और हाथी काम के न थे। भेंट की शर्तें तय हुईं: दोनों एक-एक सेवक के साथ आएँगे और कुछ रक्षक दूर खड़े रहेंगे।
02आलिंगन
शिवाजी महाराज वस्त्रों के नीचे कवच पहनकर, हाथ में बाघनख और बिछुआ लेकर आए। सभासद बखर कहती है कि उनसे बहुत ऊँचे अफ़ज़ल ख़ाँ ने उन्हें आलिंगन में लेकर सिर बगल में दबाया और कटार से वार किया, जो कवच पर फिसल गई। शिवाजी महाराज ने बाघनख और बिछुए से उसे चीर डाला। अफ़ज़ल ख़ाँ के अंगरक्षक सैयद बंडा ने आक्रमण किया तो जीवा महाला ने उसे काट गिराया। संकेत मिलते ही जंगल में छिपे मराठा सैनिक बीजापुरी शिविर पर टूट पड़े।

प्रतापगढ़ से पूरे दक्कन में शिवाजी महाराज का नाम हुआ और नवोदित स्वराज्य को एक पूरी सेना की तोपें, घोड़े और ख़ज़ाना मिला।

