साल्हेर का युद्ध

विजेतास्वराज्य (मराठा)प्रतापराव गुजर और मोरोपंत पिंगले
1672 ई.बनाम
पक्षमुग़ल साम्राज्यइख़लास ख़ान और बहलोल ख़ान

साल्हेर पहली बड़ी आमने-सामने की लड़ाई थी जो मराठों ने मुग़ल फ़ौज के विरुद्ध जीती। दो मराठा सेनाओं ने घेराबंदी करने वालों को दो ओर से दबोचा।

तिथि: फ़रवरी 1672 ई.स्थान: साल्हेर दुर्ग, बागलाण, नासिक ज़िला, महाराष्ट्रप्रकार: युद्ध
चित्र: Bhushan Kotakar · CC BY-SA 3.0
परिणाम

साल्हेर को घेरे बैठी मुग़ल सेना खुले मैदान में पराजित हुई और उसके सेनानायक बंदी बने।

01दो सेनाएँ एक साथ

शिवाजी महाराज के सैनिकों ने 1671 के आरंभ में सह्याद्रि के सबसे ऊँचे दुर्गों में एक, साल्हेर, ले लिया था। दक्कन के मुग़ल सूबेदार ने इख़लास ख़ान और बहलोल ख़ान को उसे वापस लेने भेजा। महाराज ने प्रतापराव गुजर को दक्षिण से और मोरोपंत पिंगले को कोंकण की ओर से बुलाया। दोनों ने एक साथ प्रहार किया। सभासद बखर ऐसे दिन का वर्णन करती है जब धूल इतनी घनी थी कि अपना-पराया पहचानना कठिन था। मुग़ल सेना टूट गई और उसके नायक बंदी बने।

02मूल्य

शिवाजी महाराज के पुराने साथियों में से एक, सूर्यराव काकडे, साल्हेर में खेत रहे। युद्ध के बाद साल्हेर और मुल्हेर मराठों के पास रहे, और उनके साथ दक्कन से गुजरात जाने वाला मार्ग भी। आज साल्हेर की चढ़ाई कठिन है; रास्ते में चट्टान में कटे जलकुंड हैं और शिखर पर परशुराम का छोटा मंदिर।

छत्रपति शिवाजी महाराज
व्यक्तित्व · 1630–1680 ई.; राज्याभिषेक 1674छत्रपति शिवाजी महाराज19 फ़रवरी 1630 को शिवनेरी में जन्मे शिवाजी ने पुणे के आसपास के मुट्ठी भर पहाड़ी दुर्गों से स्वतंत्र मराठा राज्य खड़ा किया, बीजापुर और मुग़लों को मात दी, औरंगज़ेब के दरबार से निकल आए, और 6 जून 1674 को रायगढ़ पर छत्रपति के रूप में अभिषिक्त हुए।पढ़ें →
महत्त्व

इसने दिखाया कि मराठा सेना छापे और घात के साथ आमने-सामने की लड़ाई में भी मुग़ल फ़ौज को हरा सकती है।