जिंजी की घेराबंदी

पक्षमराठाछत्रपति राजाराम
1690 ई.बनाम
विजेतामुग़ल साम्राज्यज़ुल्फ़िक़ार ख़ान

आठ वर्ष तक दक्षिण के सबसे मज़बूत दुर्गों में एक ने मराठा राजा को सुरक्षित रखा और एक बड़ी मुग़ल सेना को दक्कन से दूर बाँधे रखा।

तिथि: 1690–1698 ई.स्थान: जिंजी (सेंजी) दुर्ग, विल्लुपुरम ज़िला, तमिलनाडुप्रकार: घेराबंदी
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परिणाम

1698 में मुग़लों ने दुर्ग ले लिया, पर राजाराम महाराज पहले ही महाराष्ट्र निकल चुके थे।

01तीन पहाड़, एक दुर्ग

जिंजी तीन पथरीली पहाड़ियों, राजगिरि, कृष्णगिरि और चंद्रायनदुर्ग, पर बना है, जिन्हें दीवारें जोड़ती हैं। शिवाजी महाराज ने 1677 के दक्षिण अभियान में इसे लिया था। संभाजी महाराज की मृत्यु के बाद राजाराम महाराज वेश बदलकर यहाँ पहुँचे और दरबार लगाया। 1690 में ज़ुल्फ़िक़ार ख़ान ने दुर्ग घेरा, पर घेराबंदी वर्षों खिंचती रही। संताजी और धनाजी की सेनाएँ सहायता को आईं, और कहा जाता था कि मुग़ल अधिकारी भी इसे जल्द ख़त्म करने की जल्दी में नहीं थे।

02निकल जाना

1697 के अंत में राजाराम महाराज जिंजी से निकलकर महाराष्ट्र के विशालगढ़ पहुँच गए। जनवरी 1698 में दुर्ग मुग़लों के हाथ आया। तब तक युद्ध फिर उत्तर में लौट चुका था और मराठों के बीच फिर उनका राजा था।

छत्रपति राजाराम
व्यक्तित्व · 1670–1700 ई.; छत्रपति 1689–1700छत्रपति राजारामशिवाजी के छोटे पुत्र राजाराम ने फ़रवरी 1689 में, संभाजी के पकड़े जाने के कुछ ही दिन बाद, राज्य की बागडोर सँभाली और ग्यारह वर्ष तक मराठा राज्य को जीवित रखा, जबकि औरंगज़ेब की पूरी सेना दक्कन में डेरा डाले बैठी थी। यह काम उन्होंने सुदूर दक्षिण के जिंजी दुर्ग से किया।पढ़ें →
महत्त्व

जिंजी ने मराठा राज्य को उसके सबसे अँधेरे दशक में जीवित रखा, उसके राजा को ऐसा आश्रय देकर जहाँ मुग़ल पहुँच नहीं सके।