फँसी हुई मुग़ल सेना ने समर्पण किया, फिरौती दी और उसे लौट जाने दिया गया।
01जंगल का जाल
करतलब ख़ाँ की सेना भारी सामान के साथ, गर्मी में, घने जंगल से, बिना ठीक मार्गदर्शकों के उम्बरखिंड से नीचे उतरी। ढलानों पर छिपे शिवाजी महाराज के सैनिकों ने आगे और पीछे दोनों ओर का मार्ग रोक दिया और आड़ से गोलियाँ चलाईं। मुग़ल सैनिक न शत्रु को देख सकते थे, न पंक्ति बाँध सकते थे, और शीघ्र ही पानी भी समाप्त हो गया। कुछ ही घंटों में टुकड़ी असहाय हो गई।
02रायबागन की सलाह
टुकड़ी के साथ रायबागन थीं, मुग़ल सेवा में रहे एक दक्कनी मराठा परिवार की महिला सेनानायक। शिवभारत कहता है कि उन्होंने ही करतलब ख़ाँ से कहा कि प्रतिरोध व्यर्थ है और शिवाजी महाराज से शर्तें माँगने की सलाह दी। ख़ाँ ने दूत भेजे; शस्त्र, सामान और फिरौती छोड़ने के बाद शिवाजी महाराज ने सेना को जाने दिया। एक भी मराठा दुर्ग पर आँच नहीं आई।

शिवाजी महाराज की पर्वतीय युद्धनीति का उदाहरण: लगभग बिना मराठा हानि के पूरी मुग़ल टुकड़ी परास्त।
