उम्बरखिंड का युद्ध

विजेताशिवाजी महाराज के मराठेशिवाजी महाराज
1661 ई.बनाम
पक्षशाइस्ता ख़ाँ की मुग़ल सेनाकरतलब ख़ाँ, रायबागन सहित

शाइस्ता ख़ाँ ने उज़्बेक सेनापति करतलब ख़ाँ को एक जंगली दर्रे से कोंकण में उतारा। शिवाजी महाराज ने घाटी के दोनों सिरे बन्द कर पूरी टुकड़ी को फँसा लिया।

तिथि: फ़रवरी 1661 ई.स्थान: उम्बरखिंड दर्रा, लोणावला के नीचे, रायगढ़ ज़िला, महाराष्ट्रप्रकार: युद्ध
चित्र: Kiranpawar3210 · CC BY-SA 4.0
परिणाम

फँसी हुई मुग़ल सेना ने समर्पण किया, फिरौती दी और उसे लौट जाने दिया गया।

01जंगल का जाल

करतलब ख़ाँ की सेना भारी सामान के साथ, गर्मी में, घने जंगल से, बिना ठीक मार्गदर्शकों के उम्बरखिंड से नीचे उतरी। ढलानों पर छिपे शिवाजी महाराज के सैनिकों ने आगे और पीछे दोनों ओर का मार्ग रोक दिया और आड़ से गोलियाँ चलाईं। मुग़ल सैनिक न शत्रु को देख सकते थे, न पंक्ति बाँध सकते थे, और शीघ्र ही पानी भी समाप्त हो गया। कुछ ही घंटों में टुकड़ी असहाय हो गई।

02रायबागन की सलाह

टुकड़ी के साथ रायबागन थीं, मुग़ल सेवा में रहे एक दक्कनी मराठा परिवार की महिला सेनानायक। शिवभारत कहता है कि उन्होंने ही करतलब ख़ाँ से कहा कि प्रतिरोध व्यर्थ है और शिवाजी महाराज से शर्तें माँगने की सलाह दी। ख़ाँ ने दूत भेजे; शस्त्र, सामान और फिरौती छोड़ने के बाद शिवाजी महाराज ने सेना को जाने दिया। एक भी मराठा दुर्ग पर आँच नहीं आई।

छत्रपति शिवाजी महाराज
व्यक्तित्व · 1630–1680 ई.; राज्याभिषेक 1674छत्रपति शिवाजी महाराज19 फ़रवरी 1630 को शिवनेरी में जन्मे शिवाजी ने पुणे के आसपास के मुट्ठी भर पहाड़ी दुर्गों से स्वतंत्र मराठा राज्य खड़ा किया, बीजापुर और मुग़लों को मात दी, औरंगज़ेब के दरबार से निकल आए, और 6 जून 1674 को रायगढ़ पर छत्रपति के रूप में अभिषिक्त हुए।पढ़ें →
महत्त्व

शिवाजी महाराज की पर्वतीय युद्धनीति का उदाहरण: लगभग बिना मराठा हानि के पूरी मुग़ल टुकड़ी परास्त।