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“कांगड़ा की मुक्ति.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/battles/relief-of-kangra-1809/. देखा गया .
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Hindu History. (2026). कांगड़ा की मुक्ति. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/battles/relief-of-kangra-1809/
गोरखाओं ने लंबा घेरा उठाया और सतलुज के पूर्व लौट गए; रणजीत सिंह ने क़िला अपने अधिकार में ले लिया।
01संसार चंद की महत्वाकांक्षा
राजा संसार चंद कटोच ने कांगड़ा को पहाड़ी राज्यों में अग्रणी बनाया था; वे उन चित्रकारों के संरक्षक थे जिनके कांगड़ा लघुचित्र आज भी अनमोल हैं। पड़ोसियों पर उनके आक्रमणों से तंग आकर कहलूर के राजा ने गोरखा सेनापति अमर सिंह थापा को सतलुज पार बुलाया। 1806 से गोरखाओं ने बाणगंगा के ऊपर खड़े पुराने कांगड़ा क़िले को घेर लिया और आसपास का प्रदेश उजाड़ दिया। भूख और रोग ने रक्षकों को थका डाला।
02सहायता का मूल्य
1809 में संसार चंद ने सहायता के बदले क़िला देने का प्रस्ताव लेकर रणजीत सिंह की शरण ली। महाराजा गर्मियों में पहाड़ों में उतरे। लंबे घेरे से थकी सेना और सामने रणजीत सिंह की सेना देखकर अमर सिंह ने हार मानी और अगस्त में सतलुज के पार लौट गया। रणजीत सिंह ने देसा सिंह मजीठिया के अधीन क़िले में अपनी सेना रखी, और संसार चंद करद राजा के रूप में अपनी भूमि रखे रहे।

सतलुज सिख और गोरखा शक्ति के बीच की सीमा बन गई, और कांगड़ा ने पहाड़ी राज्यों का द्वार लाहौर के लिए खोल दिया।








