वांडीवाश का युद्ध

विजेताईस्ट इंडिया कंपनीकर्नल आयर कूट
1760 ई.बनाम
फ़्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनीकाउंट दे लाली; मार्क्विस दे बुसी

वांडीवाश क़िले की दीवारों के नीचे आयर कूट ने यूरोपीय ढंग से प्रशिक्षित सेनाओं की आमने-सामने की लड़ाई में लाली की सेना को हराया। इसी ने तय किया कि कर्नाटक पर कौन-सी कंपनी राज करेगी।

तिथि: 22 जनवरी 1760 ई.स्थान: वंदवासी (वांडीवाश), तिरुवन्नामलई ज़िला, तमिलनाडुप्रकार: युद्ध
चित्र: Unknown author · Public domain
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“वांडीवाश का युद्ध.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-wandiwash-1760/. देखा गया .

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Hindu History. (2026). वांडीवाश का युद्ध. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-wandiwash-1760/

परिणाम

फ़्रांसीसी सेना टूट गई और बुसी बंदी बना; फ़्रांसीसी पांडिचेरी तक पीछे धकेल दिए गए।

01क़िला वापस लेने का प्रयास

मद्रास के सामने विफल होने के बाद लाली के पास धन और सैनिकों की कमी थी, और बुसी के प्रबंध से आए मराठा घुड़सवार भरोसे के न थे। बंगाल से नए आए कूट ने नवंबर 1759 के अंत में वांडीवाश क़िला ले लिया। जनवरी 1760 में लाली उसे वापस लेने आया और दीवारों पर गोले बरसाने लगा। कूट सेना को छुड़ाने पहुँचा। 22 जनवरी की सुबह क़िले के सामने मैदान में दोनों सेनाएँ पंक्तिबद्ध हुईं, एक ओर लाली की फ़्रांसीसी रेजिमेंटें और सिपाही, दूसरी ओर कूट के ब्रिटिश नियमित सैनिक और कंपनी के सिपाही।

02युद्ध

लाली ने कूट के बाज़ू पर घुड़सवार धावे से आरंभ किया, जिसे छर्रों की गोलाबारी ने पीछे धकेल दिया। फिर फ़्रांसीसी पैदल सेना स्तंभ बनाकर आगे बढ़ी और ब्रिटिश पंक्ति से भिड़ी। एक गोला फ़्रांसीसी मोर्चे में बारूद की गाड़ी पर लगा और वह फट गई, जिससे बहुत से मारे गए और फ़्रांसीसी बायाँ बाज़ू अस्त-व्यस्त हो गया। कूट के सैनिक दबाते गए। लोरेन रेजिमेंट को फिर से जुटा रहे बुसी का घोड़ा गोली से गिरा और वह बंदी बना। फ़्रांसीसी अपनी घेरे की तोपें छोड़कर व्यवस्थित ढंग से पांडिचेरी की ओर हटे।

मद्रास का घेरा (1758–59)
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महत्त्व

वांडीवाश ने दक्षिण भारत में सत्ता के लिए फ़्रांसीसी प्रयास का अंत कर दिया। एक वर्ष के भीतर पांडिचेरी भी गिर गया।