चित्र-कथा

तानाजी मालुसरेसिंहगढ़ का सिंह

4 फ़रवरी 1670 की रात वे अपने मावलों के साथ कोंढाणा की खड़ी चट्टानें चढ़े, उदयभान राठौड़ से किला छीना और उसी लड़ाई में वीरगति पाई; शिवाजी महाराज ने उसका नाम सिंहगढ़ रखा।

मृत्यु 4 फ़रवरी 1670

पूरा जीवन
11665 की पुरंदर संधि से कोंढाणा मुग़लों के हाथ गया था।छत्रपति शिवाजी महाराज · मुग़ल सेना
2धावा 4 फ़रवरी 1670 की रात हुआ।तानाजी मालुसरे · सूर्याजी मालुसरे
3वे और मुग़ल किलेदार उदयभान राठौड़ आमने-सामने लड़कर मारे गए।तानाजी मालुसरे · उदयभान राठौड़
4उनके भाई सूर्याजी मालुसरे ने दुर्ग पर अधिकार पूरा किया।सूर्याजी मालुसरे
5सिंहगढ़ पर उनकी समाधि और प्रतिमा है।तानाजी मालुसरे

इन तथ्यों के स्रोत

  • Sabhasad Bakhar (Krishnaji Anant Sabhasad, 1697)
  • Jedhe Shakavali
  • Powada of Tanaji (Shahir Tulshidas)

वीरभोग्या वसुन्धरा

चित्र इस साइट के लिए बनाए गए हैं; चेहरे, वस्त्र और दृश्य चित्रण हैं, प्रतिमा नहीं। हर शीर्षक नायक के पृष्ठ का एक तथ्य है।