चित्र-कथा

बाजी प्रभु देशपांडेघोड़खिंड के रक्षक

13 जुलाई 1660 को उन्होंने कुछ सौ बांदल मावलों के साथ घोड़खिंड का दर्रा सिद्दी मसूद की सेना के सामने तब तक थामे रखा जब तक विशालगढ़ की तोपों ने शिवाजी महाराज के सुरक्षित पहुँचने का संकेत नहीं दिया; तभी उन्होंने प्राण छोड़े।

मृत्यु 13 जुलाई 1660

पूरा जीवन
1मार्च 1660 से सिद्दी जौहर ने पन्हाळा घेरा।छत्रपति शिवाजी महाराज · सल्तनत
212 जुलाई 1660 की रात शिवाजी पन्हाळा से निकले।छत्रपति शिवाजी महाराज · बाजी प्रभु देशपांडे
313 जुलाई 1660 को बाजी प्रभु ने घोड़खिंड रोकी और वहीं वीरगति पाई।बाजी प्रभु देशपांडे · सल्तनत
4उनके भाई फुलाजी प्रभु उसी लड़ाई में मारे गए।फुलाजी प्रभु · बाजी प्रभु देशपांडे
5पन्हाळा दुर्ग के भीतर बाजी प्रभु की प्रतिमा है।बाजी प्रभु देशपांडे

इन तथ्यों के स्रोत

  • Sabhasad Bakhar (Krishnaji Anant Sabhasad, 1697)
  • Shivabharata of Kavindra Paramananda
  • Jedhe Shakavali

वीरभोग्या वसुन्धरा

चित्र इस साइट के लिए बनाए गए हैं; चेहरे, वस्त्र और दृश्य चित्रण हैं, प्रतिमा नहीं। हर शीर्षक नायक के पृष्ठ का एक तथ्य है।