चित्र-कथा
गौतमीपुत्र सातकर्णिक्षहरातों का उन्मूलक
लगभग 124 ई. में उन्होंने पश्चिमी दक्कन में नहपान की क्षहरात सत्ता नष्ट की और नहपान के ही चाँदी के सिक्कों पर अपना नाम दोबारा अंकित कराया; उनकी माता का नासिक शिलालेख यह विजय दर्ज करता है।
शासन लगभग 106–130 ई. (एक प्रचलित गणना)
इन तथ्यों के स्रोत
- Nashik Cave 3 inscription of Gautami Balashri
- Jogaltembhi hoard (1906)
- Epigraphia Indica VIII (Nashik inscriptions)
वीरभोग्या वसुन्धरा
चित्र इस साइट के लिए बनाए गए हैं; चेहरे, वस्त्र और दृश्य चित्रण हैं, प्रतिमा नहीं। हर शीर्षक नायक के पृष्ठ का एक तथ्य है।