चित्र-कथा

समुद्रगुप्तसौ युद्धों के विजेता

लगभग 335 ई. से उन्होंने गंगा के मैदान से दक्षिण में कांची तक अभियान किए; प्रयाग स्तंभ पर हरिषेण की प्रशस्ति उन राजाओं की सूची देती है जिन्हें उन्होंने उखाड़ा और जिन्हें पुनः राज्य लौटाया।

शासन लगभग 335–375 ई.

पूरा जीवन
1उनकी प्रशस्ति प्रयागराज किले के अशोक स्तम्भ पर खुदी है।समुद्रगुप्त
2आर्यावर्त के नौ राजाओं को उखाड़ा; दक्षिण के बारह को बन्दी बनाकर छोड़ा।समुद्रगुप्त · प्रतिद्वन्द्वी राजा
3वीणावादक और अश्वमेध प्रकार के सोने के सिक्के चलाए।समुद्रगुप्त
4स्वयं को लिच्छवि-दौहित्र कहा, यानी माता की ओर से लिच्छवियों का नाती।कुमारदेवी · समुद्रगुप्त
5लगभग 335 ई. में सिंहासन पर बैठे, लगभग 375 ई. में देहान्त।समुद्रगुप्त · प्रजा
61904 में विन्सेंट स्मिथ ने उन्हें भारतीय नेपोलियन कहा; उनके अपने सिक्कों पर ‘पराक्रमः’ लिखा है।समुद्रगुप्त

इन तथ्यों के स्रोत

  • Allahabad pillar inscription (Prayag prashasti) of Harishena
  • Eran stone inscription of Samudragupta
  • Gupta gold coinage (Bayana hoard)
  • Corpus Inscriptionum Indicarum III (Fleet)

वीरभोग्या वसुन्धरा

चित्र इस साइट के लिए बनाए गए हैं; चेहरे, वस्त्र और दृश्य चित्रण हैं, प्रतिमा नहीं। हर शीर्षक नायक के पृष्ठ का एक तथ्य है।