चित्र-कथा

खारवेलकलिंगाधिपति

उदयगिरि का हाथीगुम्फा शिलालेख बताता है कि अपने राज्य के बारहवें वर्ष में उन्होंने मगध पर चढ़ाई की, वहाँ के राजा को झुकाया और नंदराज द्वारा ले जाई गई कलिंग जिन प्रतिमा वापस ले आए।

पहली शताब्दी ई.पू. (तिथि पर मतभेद, दूसरी–पहली शताब्दी ई.पू.)

पूरा जीवन
1लगभग पूरी जानकारी उदयगिरि, ओडिशा के हाथीगुम्फा अभिलेख से।खारवेल
2अभिलेख अर्हतों और सिद्धों को जैन नमस्कार से आरम्भ होता है।खारवेल
3नन्द राजा द्वारा ले जाई गई कलिंग-जिन प्रतिमा वापस लाए।खारवेल
4उदयगिरि–खण्डगिरि की जैन गुफाएँ बनवाईं।खारवेल · प्रजा
5युवराज के रूप में नौ वर्ष बाद, 24 की आयु में अभिषेक (हाथीगुम्फा)।खारवेल · प्रजा
61837 में जेम्स प्रिंसेप ने हाथीगुम्फा का पहला पाठ प्रकाशित किया।खारवेल

इन तथ्यों के स्रोत

  • Hathigumpha inscription of Kharavela
  • Epigraphia Indica XX (Jayaswal and Banerji edition)

वीरभोग्या वसुन्धरा

चित्र इस साइट के लिए बनाए गए हैं; चेहरे, वस्त्र और दृश्य चित्रण हैं, प्रतिमा नहीं। हर शीर्षक नायक के पृष्ठ का एक तथ्य है।