चित्र: NASA · Public domain
वैज्ञानिक

डॉ. विक्रम साराभाई

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक

1919 ई.—1971 ई.

12 अगस्त 1919 – 30 दिसंबर 1971

अहमदाबाद के मिल-मालिक परिवार के कॉस्मिक किरण भौतिकविद, जिन्होंने 1947 में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित की, 1963 में थुंबा से भारत का पहला रॉकेट छोड़ा और 1969 में बने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की नींव रखी।

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“डॉ. विक्रम साराभाई.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/people/vikram-sarabhai/. देखा गया .

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Hindu History. (2026). डॉ. विक्रम साराभाई. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/people/vikram-sarabhai/

जीवन के क्षण

  1. 011919 ई.

    1919 में अहमदाबाद में जन्म

  2. 021947 ई.

    1947 में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित की

  3. 031963 ई.

    1963 में थुंबा से भारत का पहला रॉकेट उड़ा

  4. 041969 ई.

    1969 में उनके नेतृत्व में इसरो बना

  5. 051971 ई.

    1971 में कोवलम में देहांत

01कॉस्मिक किरणें और पीआरएल

विक्रम का जन्म अहमदाबाद के कपड़ा उद्योगपति साराभाई परिवार में हुआ और वे ऐसे घर में बड़े हुए जहाँ टैगोर, गांधीजी और सी. वी. रमन अतिथि होते थे। उन्होंने कैम्ब्रिज में पढ़ाई की, द्वितीय विश्वयुद्ध छिड़ने पर लौट आए और बंगलौर के भारतीय विज्ञान संस्थान में रमन के अधीन कॉस्मिक किरणों पर काम किया। कैम्ब्रिज से डॉक्टरेट लेकर उन्होंने 11 नवंबर 1947 को अहमदाबाद में एक कॉलेज के कुछ कमरों से भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला शुरू की। आईआईएम अहमदाबाद और अहमदाबाद कपड़ा उद्योग अनुसंधान संघ की स्थापना में भी उनका हाथ था।

02थुंबा से इसरो

साराभाई ने सरकार को समझाया कि मौसम, संचार और शिक्षा के लिए उपग्रहों की आवश्यकता किसी धनी देश से अधिक एक निर्धन देश को है। रॉकेट केंद्र के लिए उन्होंने चुंबकीय विषुवत रेखा पर स्थित तिरुवनंतपुरम के पास के मछुआरों के गाँव थुंबा को चुना। 21 नवंबर 1963 को वहाँ से पहला साउंडिंग रॉकेट, अमेरिकी नाइकी-अपाचे, उड़ा, जिसके पुर्ज़े साइकिलों पर लॉन्च पैड तक ले जाए गए थे। 1969 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन बना और साराभाई उसके प्रमुख हुए। होमी भाभा के निधन के बाद वे परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष भी रहे। 30 दिसंबर 1971 को बावन वर्ष की आयु में कोवलम में नींद में ही उनका देहांत हुआ। 2023 में चंद्रमा पर उतरे भारत के लैंडर का नाम उन्हीं पर विक्रम रखा गया।