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“श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/ghatana/ram-janmabhoomi-verdict-2019/. देखा गया .
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Hindu History. (2026). श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/ghatana/ram-janmabhoomi-verdict-2019/
01पाँच शताब्दियाँ
हिन्दू लम्बे समय से इस स्थान को श्रीराम की जन्मभूमि मानते आए हैं। वहाँ लगे शिलालेखों के अनुसार 1528–29 में बाबर के समय उसके सरदार मीर बाक़ी ने वहाँ मस्जिद बनवाई। हिन्दू बाहरी आँगन के राम चबूतरे पर पूजा करते रहे, और उस पर मन्दिर बनाने का पहला वाद 1885 में दायर हुआ। दिसम्बर 1949 में बीच के गुम्बद के नीचे रामलला की मूर्तियाँ रखी गईं; फाटक बन्द हुए, और 1986 में न्यायालय के आदेश से खुले।
021992 और उच्च न्यायालय
6 दिसम्बर 1992 को कारसेवकों की भीड़ ने मस्जिद गिरा दी। इसके बाद कई नगरों में दंगे हुए। लिब्रहान आयोग ने 2009 में विध्वंस पर रिपोर्ट दी, और 2020 में सीबीआई की विशेष अदालत ने आपराधिक मामले के सभी 32 अभियुक्तों को षड्यन्त्र का प्रमाण न मिलने पर बरी किया। 2003 में उच्च न्यायालय के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने स्थल का उत्खनन किया और मस्जिद के नीचे एक विशाल संरचना बताई। 30 सितम्बर 2010 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भूमि तीन भागों में बाँटी, और सभी पक्षों ने अपील की।
03निर्णय
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई तथा न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे, डी. वाई. चन्द्रचूड़, अशोक भूषण और एस. अब्दुल नज़ीर की पीठ ने चालीस दिन अपीलें सुनीं। ‘एम. सिद्दीक़ बनाम महन्त सुरेश दास’ में उसके निर्णय ने माना कि पुरातत्व सर्वेक्षण को नीचे ऐसी संरचना मिली जो इस्लामी नहीं थी, कि हिन्दू पक्ष ने बाहरी आँगन में निरन्तर पूजा प्रमाणित की जबकि मुस्लिम पक्ष 1857 से पहले भीतरी ढाँचे पर अपना अनन्य क़ब्ज़ा नहीं दिखा सका, और कि 1949 में मूर्तियाँ रखना तथा 1992 का विध्वंस दोनों क़ानून का उल्लंघन थे। न्यायालय ने भूमि देवता को दी और केन्द्र सरकार से मन्दिर-निर्माण के लिए न्यास बनाने को कहा।
04निर्णय के बाद
पूरे देश में निर्णय शान्ति से स्वीकार हुआ। फ़रवरी 2020 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास बना, और 5 अगस्त 2020 को मन्दिर का भूमि-पूजन हुआ। मस्जिद के लिए पाँच एकड़ भूमि स्थल से लगभग 25 किलोमीटर दूर धन्नीपुर में दी गई; यह भूमि न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 की अपनी विशेष शक्ति से, पूर्ण न्याय के लिए, दिलवाई।

