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अयोध्या (साकेत)

सरयू तट पर इक्ष्वाकुओं का नगर, मोक्ष देने वाली सात पुरियों में पहली, श्रीराम और पाँच जैन तीर्थंकरों की जन्मभूमि। यहाँ मिला शुंग काल का एक अभिलेख इसे कोसल कहता है और इसके राजा धनदेव को पुष्यमित्र का वंशज बताता है।

निर्माण: कोसल के इक्ष्वाकुओं की राजधानी; अभिलेखों का साकेत नगरस्थान: उत्तर प्रदेश26.80° N, 82.20° E
  1. लगभग ई.पू. पहली शताब्दी
  2. 1528
  3. 9 नवम्बर 2019
  4. 22 जनवरी 2024
चित्र: Shubhamanand2580 · CC BY-SA 4.0

01राजाओं का साकेत

वाल्मीकि की अयोध्या वह नगरी है जिसे मनु ने सरयू तट पर बसाया, वह नगरी जिससे युद्ध न किया जा सके। ऐतिहासिक लेखों में यही साकेत भी है: पाणिनि के टीकाकार और बौद्ध-जैन ग्रन्थ यही नाम लेते हैं, और बुद्ध के समय यह कोसल के बड़े नगरों में था। अयोध्या में मिला ब्राह्मी लिपि का एक अभिलेख दर्ज करता है कि कोसलाधिपति धनदेव ने, जो दो अश्वमेध करने वाले सेनापति पुष्यमित्र से छठी पीढ़ी में थे, अपने पिता का स्मारक खड़ा किया। उसके बाद अयोध्या के स्थानीय देव राजाओं के सिक्के मिलते हैं। जैन परम्परा मानती है कि प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ और चार अन्य, अजितनाथ, अभिनन्दननाथ, सुमतिनाथ और अनन्तनाथ, यहीं जन्मे।

02जीवित नगरी

अयोध्या श्रीराम के चारों ओर जीती है। यात्री पहले हनुमानगढ़ी की सीढ़ियाँ चढ़ते हैं, क्योंकि हनुमान नगर के रक्षक हैं; फिर सीता का महल कनक भवन, सरयू के घाट, राम की पैड़ी, और गुप्तार घाट, जहाँ परम्परा के अनुसार श्रीराम ने लोक त्यागा। पाँच, चौदह और चौरासी कोस की परिक्रमाएँ कार्तिक और चैत्र में लाखों को खींचती हैं। जन्मभूमि की अपनी कथा, 1528 की मस्जिद से 22 जनवरी 2024 को प्रतिष्ठित मन्दिर तक, उसके अपने पृष्ठ पर है। 2017 से दीपावली की पूर्व-सन्ध्या पर दीपोत्सव राम की पैड़ी पर लाखों दीप जलाता है।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. लगभग ई.पू. पहली शताब्दीकोसलाधिपति धनदेव पुष्यमित्र के दो अश्वमेधों का उल्लेख करने वाला अभिलेख लगवाते हैं।
  2. 1528मीर बाक़ी जन्मभूमि पर मस्जिद बनवाता है।
  3. 9 नवम्बर 2019सर्वोच्च न्यायालय जन्मभूमि स्थल मन्दिर के लिए देता है।
  4. 22 जनवरी 2024नए मन्दिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा।
दर्शन और यात्रा

अयोध्या धाम स्टेशन और महर्षि वाल्मीकि हवाई अड्डा नगर से जुड़े हैं। परम्परा के अनुसार जन्मभूमि से पहले हनुमानगढ़ी जाएँ, और सन्ध्या की सरयू आरती तक रुकें।

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