पटियाला का घेरा (1779)

विजेतापटियाला राज्य और सिख सरदारपटियाला के राजा अमर सिंह
1779 ई.बनाम
मुग़ल शाही सेनानवाब अब्दुल अहद ख़ान

1779 में शाह आलम द्वितीय के मंत्री अब्दुल अहद ख़ान ने यमुना और सतलुज के बीच के सिख प्रदेश में अंतिम गंभीर मुग़ल अभियान चलाया। उसका अंत पटियाला से वापसी में हुआ।

तिथि: अक्टूबर 1779 ई.स्थान: पटियाला, पंजाबप्रकार: घेराबंदी
चित्र: Pragya Sharan · CC BY-SA 4.0
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परिणाम

मुग़ल सेना क़िला न ले सकी और सिख सहायता के पास आते ही दिल्ली लौट गई।

01अब्दुल अहद का अभियान

कश्मीरी अमीर अब्दुल अहद ख़ान 1770 के दशक के अंत में बादशाह के दरबार पर छाया हुआ था। वह सतलुज के इस पार के सिख सरदारों से राजस्व वापस पाना चाहता था और जून 1779 में शहज़ादे के साथ दिल्ली से निकला। कुछ सरदार उसकी ओर आ गए; दूसरों को वह पटियाला के विरुद्ध खड़ा करना चाहता था। पटियाला के राजा अमर सिंह और तारा सिंह घेबा ने अक्टूबर के आरंभ में मैदान में मुग़ल सेना का सामना किया और पीछे हटकर क़िले में आ गए।

02माझा से सहायता

मुग़लों ने पटियाला को घेरा पर भीतर न घुस सके। इस बीच अमर सिंह ने चुपचाप सतलुज पार सहायता के लिए संदेश भेजा, और कन्हैया सरदार, जस्सा सिंह आहलूवालिया और जस्सा सिंह रामगढ़िया उसकी सहायता को चल पड़े। उनके आने की ख़बर पाकर नवाब ने लगभग 14 अक्टूबर को घेरा उठा लिया, बघेल सिंह से कहा कि बादशाह ने उसे वापस बुलाया है, और दिल्ली लौट गया। इसके कुछ ही समय बाद अब्दुल अहद का दरबार में प्रभाव समाप्त हुआ और मिर्ज़ा नजफ़ ख़ान ने साम्राज्य का काम सँभाला।

महत्त्व

पटियाला की विफलता से सतलुज के इस पार के प्रदेश पर शासन के मुग़ल प्रयास समाप्त हो गए; वहाँ के सिख सरदारों ने फिर कभी दिल्ली की नहीं मानी।