मावंडा और मंढोली का युद्ध

विजेताजयपुर राज्यसवाई माधो सिंह प्रथम, अपने राजपूत सरदारों के द्वारा
1767 ई.बनाम
भरतपुर के जाटमहाराजा जवाहर सिंह

सूरजमल के पुत्र जवाहर सिंह बिना अनुमति जयपुर राज्य से होते हुए पुष्कर स्नान को गए। लौटते समय कछवाहा सामंतों ने मावंडा के पास पहाड़ियों में उन पर धावा बोला।

तिथि: दिसंबर 1767 ई.स्थान: मावंडा और मंढोली, नीम का थाना के पास, राजस्थानप्रकार: युद्ध
चित्र: Bornav27may · CC BY-SA 3.0
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“मावंडा और मंढोली का युद्ध.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-maonda-mandholi-1767/. देखा गया .

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Hindu History. (2026). मावंडा और मंढोली का युद्ध. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-maonda-mandholi-1767/

परिणाम

जयपुर के राजपूतों ने पुष्कर से लौटती जवाहर सिंह की सेना को भगा दिया, यद्यपि उनके अपने कई प्रमुख सामंत खेत रहे।

01पुष्कर की यात्रा

सूरजमल ने जयपुर घराने से अच्छे संबंध रखे थे। उनके पुत्र जवाहर सिंह ने नहीं। उनके पास यूरोपीय अफ़सरों और तोपख़ाने वाली सबल सेना थी, जयपुर की भूमि पर उनकी नज़र थी, और वे इस बात से रुष्ट थे कि जयपुर ने उनके विद्रोही सौतेले भाई नाहर सिंह को शरण दी थी। 1767 के अंत में वे कार्तिक स्नान के लिए सेना लेकर जयपुर राज्य से होते हुए पुष्कर गए, और माधो सिंह के विरोध को अनसुना कर दिया। जयपुर के सामंत लौटते समय उनका रास्ता रोकने को अपने आदमी लेकर जुटे।

02पहाड़ियों में लड़ाई

दिसंबर 1767 में आज के नीम का थाना के पास, मावंडा और मंढोली की ऊबड़-खाबड़ भूमि में राजपूतों ने जाट सेना पर प्रहार किया। लड़ाई भीषण थी। जाट सेना भाग खड़ी हुई, उसका सामान और बहुत-सा तोपख़ाना छूट गया, और जवाहर सिंह कठिनाई से बच निकले। यह जीत जयपुर को महँगी पड़ी: उसके बहुत-से प्रमुख कछवाहा ठाकुर रणक्षेत्र में खेत रहे। कुछ महीनों बाद माधो सिंह का निधन हो गया।

आमेर और जयपुर के कछवाहा
राजवंश · लगभग ग्यारहवीं शताब्दी–1949 ई.आमेर और जयपुर के कछवाहाकछवाहों ने आमेर से ढूँढाड़ पर राज किया। 1562 से मुगलों के सहयोगी बनकर वे साम्राज्य के बड़े सेनापति बने; फिर सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर और उसकी वेधशालाएँ बनवाईं।पढ़ें →
महत्त्व

इस युद्ध ने क्षेत्र के दोनों हिंदू राज्यों का रक्त ठीक उस समय बहाया जब मराठे और नजफ़ ख़ान उन पर दबाव बढ़ा रहे थे, और अगले वर्ष जवाहर सिंह की हत्या हो गई।