क़लात का युद्ध

विजेताईस्ट इंडिया कंपनी (सिंधु सेना)मेजर-जनरल थॉमस विल्शायर
1839 ई.बनाम
क़लात ख़ानतक़लात के ख़ान मेहराब ख़ान

प्रथम आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध में काबुल से लौटती एक ब्रिटिश सेना क़लात के ख़ान पर टूट पड़ी, जिसे वह बोलान से गुज़रती अपनी रसद-रेखा पर हमलों का दोषी मानती थी। फाटक उड़ा दिया गया और एक ही दिन में गढ़ ले लिया गया।

तिथि: 13 नवंबर 1839 ई.स्थान: क़लात, बलूचिस्तान (पाकिस्तान)प्रकार: युद्ध
चित्र: Unknown author · Public domain
2 मिनट का पाठ WhatsApp
उद्धृत करें

MLA

“क़लात का युद्ध.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-kalat-1839/. देखा गया .

APA

Hindu History. (2026). क़लात का युद्ध. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-kalat-1839/

परिणाम

गढ़ पर धावा कर उसे लिया गया और उसकी रक्षा करते हुए मेहराब ख़ान मारे गए; अंग्रेज़ों ने एक प्रतिद्वंद्वी दावेदार को ख़ान बनाया।

01बोलान का मार्ग

1839 में कंपनी की सिंधु सेना शाह शुजा को काबुल की गद्दी पर बिठाने के लिए सिंध से बोलान दर्रे और क्वेटा होकर बढ़ी। यह मार्ग क़लात के ब्राहुई ख़ान मेहराब ख़ान के प्रदेश से गुज़रता था। अंग्रेज़ों ने उन पर रसद न देने और उन क़बीलों को उकसाने का आरोप लगाया जो उनके क़ाफ़िले लूटते थे। शरद में जब सेना का एक भाग भारत लौट रहा था, तब विल्शायर की सेना को उन्हें दंड देने का आदेश मिला।

02गढ़ पर धावा

13 नवंबर 1839 को विल्शायर क़लात पहुँचा। उसकी पैदल सेना ने नगर के बाहर की पहाड़ियों से ख़ान के सैनिकों को हटाया, और तोपों ने मुख्य फाटक पर तब तक गोले बरसाए जब तक वह टूट नहीं गया। सैनिक पीछे हटते रक्षकों के पीछे-पीछे भीतर घुसे, और गढ़ तक गलियों में कड़ी लड़ाई हुई। मेहराब ख़ान अपने बहुत से सरदारों के साथ हाथ में तलवार लिए मारे गए। अंग्रेज़ों ने प्रतिद्वंद्वी शाखा के शाह नवाज़ ख़ान को उनकी जगह बिठाया, पर एक वर्ष के भीतर मेहराब ख़ान के पुत्र नासिर ख़ान ने क़लात वापस ले लिया।

महत्त्व

क़लात ने कुछ समय के लिए बोलान का मार्ग सुरक्षित किया, पर बलूच प्रदेश को अंग्रेज़ों के विरुद्ध भड़का दिया, और दिखा दिया कि अफ़ग़ान अभियान कितने कच्चे धागों से बँधा था।