फ़र्रुख़ाबाद का युद्ध

विजेताईस्ट इंडिया कंपनी के घुड़सवार और घोड़ा-तोपख़ानाजनरल जेरार्ड लेक
1804 ई.बनाम
इंदौर के होलकरयशवंतराव होलकर

दिल्ली न ले पाने के बाद यशवंतराव होलकर अपने घुड़सवारों के साथ दोआब में धावे करने लगा। लेक ने पूरे प्रदेश में उसका पीछा किया और भोर से पहले फ़र्रुख़ाबाद में उसके डेरे पर टूट पड़ा।

तिथि: नवंबर 1804 ई.स्थान: फ़र्रुख़ाबाद, उत्तर प्रदेशप्रकार: युद्ध
चित्र: Unknown author · Public domain
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Hindu History. (2026). फ़र्रुख़ाबाद का युद्ध. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-farrukhabad-1804/

परिणाम

लेक ने भोर में होलकर के घुड़सवार डेरे पर अचानक धावा करके उसे बिखेर दिया; यशवंतराव बच निकला।

01दोआब के आर-पार पीछा

अक्टूबर 1804 में होलकर की सेना ने दिल्ली को घेरा, जहाँ ऑक्टरलोनी डटा रहा। जब लेक सहायता को आया, तो यशवंतराव ने अपनी सेना बाँट दी: पैदल सेना और तोपें डीग की ओर गईं, और वह स्वयं घुड़सवारों को लेकर यमुना के पूर्व दोआब में जलाता-लूटता बढ़ा। लेक अपने घुड़सवारों और घोड़ा-तोपख़ाने के साथ दिन-प्रतिदिन लंबी दूरियाँ तय करता उसके पीछे लगा रहा, जबकि जनरल फ़्रेज़र पैदल सेना लेकर मराठा तोपों के पीछे गया।

02फ़र्रुख़ाबाद की भोर

होलकर ने फ़र्रुख़ाबाद में यह मानकर डेरा डाला कि लेक बहुत पीछे है। उसी रात उसे ख़बर मिली कि 13 नवंबर को डीग में उसकी पैदल सेना हार गई है। लेक का दस्ता रात भर चलता रहा, और पौ फटते ही उसके घोड़ा-तोपख़ाने ने सोते डेरे पर गोले बरसाए, जिसके बाद ड्रैगून और देसी घुड़सवारों ने धावा किया। मराठा घुड़सवार बिखर गए। यशवंतराव बच निकला और पश्चिम जाकर डीग में अपनी बची सेना से मिला।

इन्दौर के होलकर
राजवंश · 1733–1948 ई.इन्दौर के होलकरजेजुरी के पास होळ गाँव के एक धनगर के पुत्र मल्हारराव होलकर बाजीराव प्रथम के अधीन बढ़कर पश्चिमी मालवा के स्वामी बने। उनकी पुत्रवधू अहिल्याबाई ने अट्ठाईस वर्ष महेश्वर से राज किया और भारत भर में मन्दिर फिर से बनवाए, जिनमें आज खड़ा काशी विश्वनाथ मन्दिर भी है।पढ़ें →
महत्त्व

फ़र्रुख़ाबाद ने होलकर को दोआब से बाहर कर दिया, पर वह भरतपुर में टिका रहा, जहाँ 1805 के आरंभ में लेक के चार धावे विफल हुए।