चित्र-कथा

तात्या टोपे1857 के सेनापति

जून 1858 में उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के साथ ग्वालियर जीता और रानी की मृत्यु के बाद दस महीने मध्य भारत में छापामार युद्ध चलाते रहे, जब तक विश्वासघात से पकड़े जाकर अप्रैल 1859 में शिवपुरी में फाँसी नहीं दी गई।

1814 – 18 अप्रैल 1859

पूरा जीवन
1नासिक ज़िले के येवला में जन्म; अधिकांश स्रोत 1814 बताते हैं।
2नरवर के मानसिंह के विश्वासघात से 7 अप्रैल 1859 को बंदी।तात्या टोपे · अंग्रेज़ · नरवर के मानसिंह
318 अप्रैल 1859 को शिवपुरी में फाँसी।तात्या टोपे
41984 में उन पर डाक टिकट जारी हुआ।तात्या टोपे
5उनका मूल नाम रामचन्द्र पाण्डुरंग था।तात्या टोपे

इन तथ्यों के स्रोत

  • Statement of Tatya Tope at his trial, Shivpuri, April 1859
  • S. N. Sen, Eighteen Fifty-Seven (1957)
  • Kaye and Malleson, History of the Indian Mutiny (1888–89)

वीरभोग्या वसुन्धरा

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