चित्र-कथा

रुद्रमा देवीवारंगल की रुद्रदेव महाराज

लगभग 1262 से उन्होंने ओरुगल्लु (वारंगल) से अपने नाम पर काकतीय राज्य चलाया, सेउण यादव राजा महादेव को पीछे खदेड़ा और विद्रोही सामंतों को झुकाया।

शासन लगभग 1262–1289 ई.

पूरा जीवन
1शिलालेख उसे ‘रुद्रदेव महाराज’ कहते हैं, जो राजा की उपाधि है।रुद्रमा देवी · प्रजा
2उसकी राजधानी ओरुगल्लु थी, आज का वारंगल (तेलंगाना)।रुद्रमा देवी
3मार्को पोलो मोटुपल्ली बंदरगाह से उसके शासन का वर्णन करता है।रुद्रमा देवी
4चंदुपटला शिलालेख (1289) उसकी मृत्यु दर्ज करता है।रुद्रमा देवी
5उसके बाद उसका दौहित्र प्रतापरुद्र राजा बना।रुद्रमा देवी · प्रतापरुद्र
6पिता गणपतिदेव के बाद लगभग 1262 में उन्होंने पूरा शासन सँभाला।रुद्रमा देवी · प्रजा

इन तथ्यों के स्रोत

  • Chandupatla inscription (1289)
  • The Travels of Marco Polo
  • Kakatiya inscriptions, Epigraphia Andhrica

वीरभोग्या वसुन्धरा

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