अदोनी का घेरा (1786)

विजेतामैसूर राज्यटीपू सुल्तान
1786 ई.बनाम
निज़ाम की सेना, मराठा-हैदराबाद सहायक सेना के साथमहाबत जंग; हरिपंत फड़के

अदोनी तुंगभद्रा के दक्षिण में निज़ाम का मज़बूत दुर्ग था, जिसे उसका भतीजा महाबत जंग सँभाले था। टीपू ने उसे घेरा; मराठा-हैदराबाद की संयुक्त सेना सहायता को आई, पर उसने दुर्ग की सेना को निकाल ले जाना ही ठीक समझा, और दुर्ग मैसूर के हाथ आया।

तिथि: जून 1786 ई.स्थान: अदोनी दुर्ग, कर्नूल ज़िला, आंध्र प्रदेशप्रकार: घेराबंदी
चित्र: Aakash.gautam · CC BY-SA 3.0
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“अदोनी का घेरा (1786).” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/battles/siege-of-adoni-1786/. देखा गया .

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परिणाम

सहयोगी सेना दुर्ग की सेना और परिवारों को निकाल ले गई, और टीपू ने ख़ाली दुर्ग पर अधिकार कर अदोनी को अपने राज्य में मिला लिया।

01निज़ाम की सीमा-चौकी

अदोनी ग्रेनाइट की पहाड़ियों के झुंड पर बसा है; कभी यह विजयनगर का गढ़ था, फिर बीजापुर और मुग़लों के अधीन रहा। 1786 तक यह निज़ाम का था। टीपू के बढ़ने पर सूबेदार महाबत जंग ने हैदराबाद और पुणे को तुरंत पत्र भेजे। उसके दूत ने टीपू को लौटाने के लिए धन भी देना चाहा, जिसे टीपू ने ठुकरा दिया। हरिपंत फड़के के अधीन पेशवा के घुड़सवार और निज़ाम की सेना मार्ग में मिलकर अदोनी पर आ पहुँचे।

02बिना लड़े राहत

सहायक सेना दुर्ग तक पहुँची, पर उसने पास ही पड़े टीपू की मुख्य सेना से निर्णायक युद्ध नहीं छेड़ा। इसके बदले सहयोगियों ने महाबत जंग, उसके सैनिकों और दुर्ग के परिवारों को बाहर निकाला और उत्तर की ओर लौट गए। टीपू भीतर आया। पीछे छूटी तोपें और भंडार उसके हाथ लगे, और अदोनी मैसूर में मिला लिया गया। यह जीत सस्ती थी, और इससे नदी के दक्षिण निज़ाम का अंतिम मज़बूत ठिकाना जाता रहा।

महत्त्व

अदोनी के साथ निज़ाम का तुंगभद्रा के दक्षिण का सबसे मज़बूत ठिकाना गया, और दिखा कि 1786 के सहयोगी टीपू के विरुद्ध कितना कम जोखिम उठाने को तैयार थे।