मनिहारी का युद्ध

विजेताबंगाल का नवाबसिराजुद्दौला; उसका सेनापति मोहनलाल
1756 ई.बनाम
पूर्णिया का फ़ौजदारशौकत जंग

कलकत्ता जीतने के चार महीने बाद सिराजुद्दौला अपने ही चचेरे भाई पर टूट पड़ा। पूर्णिया के शौकत जंग ने दिल्ली से स्वयं को नवाब बनाने वाली सनद मँगवा ली थी, और गंगा किनारे के दलदलों में उसे इसकी कीमत प्राणों से चुकानी पड़ी।

तिथि: अक्टूबर 1756 ई.स्थान: मनिहारी, पूर्णिया के पास, बिहारप्रकार: युद्ध
चित्र: Francis Hayman · Public domain
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“मनिहारी का युद्ध.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-manihari-1756/. देखा गया .

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Hindu History. (2026). मनिहारी का युद्ध. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-manihari-1756/

परिणाम

शौकत जंग युद्ध में गोली लगने से मारा गया और पूर्णिया सिराजुद्दौला के हाथ आ गया।

01अलीवर्दी के दो नाती

अप्रैल 1756 में अलीवर्दी ख़ान का देहांत हुआ और बंगाल उसके नाती सिराजुद्दौला को मिला। दूसरा नाती शौकत जंग गंगा के उत्तर के समृद्ध ज़िले पूर्णिया में था। सिराज से चिढ़े दरबारियों ने, जिनमें मीर जाफ़र भी था, शौकत जंग को पत्र लिखे, और उसने दिल्ली के वज़ीर के माध्यम से बंगाल की सूबेदारी की शाही सनद प्राप्त कर ली। फिर उसने सिराज को अपमानजनक पत्र भेजा। सिराज अभी-अभी अंग्रेज़ों से फ़ोर्ट विलियम छीनकर लौटा था। वह तुरंत उत्तर की ओर चल पड़ा।

02दलदल में लड़ाई

शौकत जंग ने राजमहल से पूर्णिया आने वाली राह पर मनिहारी के पास एक दलदल के पीछे मोर्चा लगाया, जिस पर पार जाने का एक ही बाँध था। उसके घुड़सवार बिना किसी क्रम के उस पार धावा कर बैठे। मोहनलाल के आदमियों द्वारा चलाई गई नवाब की तोपों ने उन्हें दूसरी ओर ही तोड़ दिया। अधिकांश वृत्तांतों के अनुसार नशे में और बुरी सलाह पर चलता शौकत जंग हाथी पर लड़ाई में उतरा और माथे पर बंदूक़ की गोली लगने से मारा गया। उसकी सेना बिखर गई। सिराज ने पूर्णिया और उसका ख़ज़ाना सँभालने मोहनलाल के अधिकारी भेजे।

महत्त्व

यह सिराजुद्दौला की अंतिम विजय थी। जिन अमीरों ने शौकत जंग का साथ दिया था, वे अब अंग्रेज़ों की ओर मुड़े, और आठ महीने बाद प्लासी हुआ।