गुजरात (पंजाब) का युद्ध (1797)

विजेतासिख सरदारसाहिब सिंह भंगी, मिलखा सिंह आदि, बेदी राम सिंह के आह्वान पर
1797 ई.बनाम
रोहतास का दुर्रानी हाकिमअहमद ख़ान शाहंचीबाशी

शाह ज़मान ने झेलम और सिंधु के बीच का प्रदेश सँभालने को अहमद ख़ान शाहंचीबाशी को रोहतास में छोड़ा था। जब उसने गुजरात के सिख सरदारों पर चढ़ाई की, तो वे इकट्ठे हुए और उसकी सेना तोड़ दी।

तिथि: 1797 ई.स्थान: गुजरात, झेलम और चिनाब के बीच (अब पाकिस्तान में)प्रकार: युद्ध
चित्र: Pragya Sharan · CC BY-SA 4.0
1 मिनट का पाठ WhatsApp
उद्धृत करें

MLA

“गुजरात (पंजाब) का युद्ध (1797).” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-gujrat-1797/. देखा गया .

APA

Hindu History. (2026). गुजरात (पंजाब) का युद्ध (1797). प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-gujrat-1797/

परिणाम

अफ़ग़ान हाकिम गुजरात के पास पराजित हुआ और उसका डेरा लूट लिया गया।

01पीछे छोड़ा गया हाकिम

1797 के आरंभ में शाह ज़मान अपने भाई महमूद से निपटने काबुल लौट गया। रोहतास में उसके हाकिम अहमद ख़ान शाहंचीबाशी को आदेश था कि सिख सरदारों को चिनाब के पश्चिम अपनी ज़मीनों पर लौटने न दे। गुजरात साहिब सिंह भंगी के पास था और मिलखा सिंह रावलपिंडी तक बढ़ चुके थे। जब स्थानीय सरदार हयात ख़ान ने साहिब सिंह के विरुद्ध विद्रोह किया, तो हाकिम सिखों को कुचलने झेलम पार आया।

02धर्मयुद्ध का आह्वान

सिख परंपरा याद रखती है कि सियालकोट इलाक़े के कोटली के बेदी राम सिंह ने हाकिम के अत्याचारों के विरुद्ध खालसा को धर्मयुद्ध के लिए पुकारा, और दोआब के सरदार साहिब सिंह के साथ आ मिले। गुजरात के पास उन्होंने अफ़ग़ानों से भिड़कर उन्हें तितर-बितर कर दिया और उनका सामान छीन लिया। रोहतास कुछ समय दुर्रानियों के पास ही रहा, पर झेलम के पूर्व अफ़ग़ान अब बेरोकटोक नहीं घूम सकते थे।

महत्त्व

उसी सर्दी के अमृतसर युद्ध के साथ गुजरात की विजय ने शाह ज़मान के तीसरे आक्रमण के लाभ मिटा दिए।