चित्र-कथा

राणा कुम्भाकुम्भलगढ़ के निर्माता

1437 में सारंगपुर में उन्होंने मालवा के महमूद खलजी को हराया और इस विजय की स्मृति में चित्तौड़गढ़ में विजय स्तंभ बनवाया।

शासन 1433–1468 ई.

पूरा जीवन
11437 में उन्होंने सारंगपुर में मालवा के महमूद खलजी को हराया।राणा कुम्भा · सल्तनत
2चित्तौड़ का विजय स्तंभ नौ मंज़िला है।राणा कुम्भा
3कुंभलगढ़ की बाहरी प्राचीर लगभग 36 किलोमीटर लंबी है।राणा कुम्भा
4उन्होंने ‘संगीतराज’ और ‘गीतगोविंद’ पर टीका लिखी।राणा कुम्भा
5रणकपुर जैन मंदिर उनके राज्य में 1437 में आरंभ हुआ।राणा कुम्भा

इन तथ्यों के स्रोत

  • Kirti Stambha prashasti, Chittor (1460)
  • Kumbhalgarh prashasti (1460)
  • Sangitaraja of Kumbhakarna

वीरभोग्या वसुन्धरा

चित्र इस साइट के लिए बनाए गए हैं; चेहरे, वस्त्र और दृश्य चित्रण हैं, प्रतिमा नहीं। हर शीर्षक नायक के पृष्ठ का एक तथ्य है।