चित्र-कथा
चिलारायकोच सेना के चील
1563 में नरनारायण के भाई इस कोच सेनापति ने ब्रह्मपुत्र पार कर अहोम राजधानी गढ़गाँव जीत ली; उनकी कूच इतनी तेज़ थी कि लोग उन्हें चील कहने लगे।
लगभग 1510–1571 ई.
इन तथ्यों के स्रोत
- Darrang Raj Vamsavali
- Kamakhya temple inscription (1565)
- Katha Guru Charit
वीरभोग्या वसुन्धरा
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