गाले का घेरा

विजेताडच ईस्ट इंडिया कंपनीविलेम याकोब्सज़ून कोस्टर
1640 ई.बनाम
पुर्तगाली रक्षक-दलगाले का पुर्तगाली कप्तान

बट्टीकलोआ और त्रिकोणमलै के बाद डच दक्षिण-पश्चिमी तट की ओर मुड़े। मार्च 1640 में वे गाले में उतरे और धावा करके पुर्तगाली क़िला ले लिया।

तिथि: मार्च 1640 ई.स्थान: गाले, दक्षिणी श्रीलंकाप्रकार: घेराबंदी
चित्र: Gbaadkar · CC BY-SA 3.0
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“गाले का घेरा.” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/battles/siege-of-galle-1640/. देखा गया .

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Hindu History. (2026). गाले का घेरा. प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/battles/siege-of-galle-1640/

परिणाम

डचों ने गाले पर धावा करके उसे ले लिया, जो कोलंबो लेने तक लंका में उनका प्रमुख बंदरगाह रहा।

01डच पश्चिम की ओर

लंका के दक्षिणी तट पर गाले का अच्छा प्राकृतिक बंदरगाह था, और पुर्तगालियों ने स्थल की ओर उसकी दीवार बनाई थी। राजसिंह द्वितीय के गठबंधन और समुद्र पर अपने बेड़े के नियंत्रण के बल पर डचों ने विलेम याकोब्सज़ून कोस्टर को जहाज़ों और सैनिकों के साथ भेजा। वे मार्च 1640 में उतरे, तोपख़ाने जमाए और बुर्जों पर गोले बरसाए। कुछ ही दिनों में दरार बनी, और डच धावे से भीतर घुसकर गलियों में लड़ते हुए आगे बढ़े।

02डचों के अधीन गाले

धावे में बहुत से पुर्तगाली रक्षक मारे गए और शेष बंदी बने। स्वयं कोस्टर कुछ ही समय बाद कैंडी वालों से झगड़े में मारा गया, जो गठबंधन के तनाव का संकेत था। अगले पंद्रह वर्षों तक गाले लंका में डच मुख्यालय रहा। 1663 के बाद उन्होंने बड़े पैमाने पर उसकी दीवारें फिर बनाईं, और उनका छोड़ा गाले क़िला आज विश्व धरोहर स्थल है, जिसकी पुरानी गलियों में आज भी लोग रहते हैं।

महत्त्व

गाले ने डचों को लंका के दालचीनी तट पर पहला सुरक्षित आधार दिया, जहाँ से उन्होंने 1656 में कोलंबो लिया।