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“ज़ोजी ला का युद्ध (ऑपरेशन बाइसन).” Hindu History, 2026, https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-zoji-la-1948/. देखा गया .
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Hindu History. (2026). ज़ोजी ला का युद्ध (ऑपरेशन बाइसन). प्राप्त , स्रोत: https://www.hinduhistory.in/hi/battles/battle-of-zoji-la-1948/
भारतीय हल्के टैंकों ने अचानक धावे से दर्रा ले लिया; द्रास और कारगिल वापस लिए गए और लेह का मार्ग फिर खुल गया।
01कटा हुआ लद्दाख
1948 में पाकिस्तानी सेना और हमलावर बाल्टिस्तान से होते हुए कारगिल और द्रास ले चुके थे और ज़ोजी ला थामे हुए थे, जो कश्मीर घाटी को लद्दाख से जोड़ने वाला दर्रा है। लेह हवाई मार्ग से रसद पाने वाली छोटी सेना के हाथ में था। सितंबर में दर्रे पर पैदल धावे सधी हुई मशीनगनों के आगे विफल रहे। कश्मीर में कमान सँभाल रहे मेजर जनरल के. एस. थिमय्या ने टैंक भेजने का निर्णय किया।
02बर्फ़ में टैंक
7वीं कैवेलरी के स्टुअर्ट हल्के टैंक आंशिक रूप से खोलकर श्रीनगर लाए गए, फिर रात में उस खच्चर-मार्ग पर चढ़ाए गए जिसे इंजीनियरों ने चौड़ा करके सड़क बनाया। योजना गुप्त रखने के लिए अभियान का नाम पहले डक रखा गया और फिर बाइसन। 1 नवंबर 1948 को टैंक, सबसे आगे वाले में स्वयं थिमय्या बैठे हुए, बर्फ़ और कुहासे के बीच दर्रे पर चढ़ आए। रक्षकों ने उस ऊँचाई पर बख़्तरबंद गाड़ियों की कल्पना भी न की थी, और वे बिखर गए।
03लद्दाख बचा
भारतीय ब्रिगेड आगे द्रास और कारगिल तक बढ़ी और लेह से आ रहे सैनिकों से जा मिली। 1 जनवरी 1949 को युद्धविराम हुआ तो लद्दाख भारत के हाथ में था। ज़ोजी ला को बहुत समय तक वह सबसे ऊँचा स्थान बताया जाता रहा जहाँ युद्ध में टैंकों का प्रयोग हुआ।
ऑपरेशन बाइसन ने लद्दाख को भारत में बनाए रखा।

