चित्र: DesiBoy101 · CC BY-SA 4.0
स्वतंत्रता सेनानी

चापेकर बंधु

1897 में पुणे के प्लेग आयुक्त को मारने वाले भाई

1869 ई.—1899 ई.

दामोदर 25 जून 1869 – 18 अप्रैल 1898; बालकृष्ण 1873 – 12 मई 1899; वासुदेव 1879/80 – 8 मई 1899

पुणे के पास चिंचवड के तीन भाई। दामोदर और बालकृष्ण ने 22 जून 1897 को प्लेग आयुक्त डब्ल्यू. सी. रैंड को गोली मारी, और तीनों फाँसी चढ़े।

01पुणे में प्लेग

1896–97 में पुणे में प्लेग फैला। वाल्टर चार्ल्स रैंड की अध्यक्षता वाली विशेष प्लेग समिति ने रोगियों की खोज के लिए सैनिकों को घरों में भेजा; परिवारों को शिविरों में ले जाया गया, घर ख़ाली कराए गए और जूतों समेत पूजाघरों और रसोइयों में प्रवेश हुआ। चिंचवड के एक कीर्तनकार के पुत्र दामोदर हरि चापेकर और उनके भाई पहले ही युवकों को व्यायाम और शस्त्र सिखाने वाला दल बना चुके थे। 22 जून 1897 की रात, जब रैंड गणेशखिंड के गवर्नमेंट हाउस में हीरक जयंती समारोह से लौट रहा था, दामोदर ने उसे गोली मारी और बालकृष्ण ने पीछे आ रहे लेफ़्टिनेंट आयर्स्ट को। आयर्स्ट वहीं मरा, रैंड 3 जुलाई को।

02यरवदा की फाँसी

द्रविड़ बंधुओं की सूचना पर दामोदर पकड़े गए, मुक़दमा चला और 18 अप्रैल 1898 को यरवदा में उन्हें फाँसी हुई; जेल में उन्होंने अपना आत्मवृत्त लिखा। फ़रवरी 1899 में वासुदेव ने महादेव विनायक रानडे के साथ दोनों द्रविड़ भाइयों को गोली मारी। 8 मई 1899 को वासुदेव, 10 मई को रानडे और 12 मई को बालकृष्ण को फाँसी दी गई। चिंचवड का उनका पैतृक घर, चापेकर वाड़ा, आज स्मारक है, और 2018 में दामोदर हरि चापेकर पर डाक टिकट जारी हुआ।

चिंचवड
स्थान · पवना तट पर मोरया गोसावी की समाधि, 16वीं शताब्दीचिंचवडपुणे के पास पवना तट का वह नगर जहाँ महान गाणपत्य सन्त मोरया गोसावी ने समाधि ली, और जिसका देव परिवार शताब्दियों तक मंगलमूर्ति को मोरगाँव ले जाता रहा। यही 1897 में रैण्ड को गोली मारने के लिए फाँसी पाने वाले चाफेकर बन्धुओं का घर भी था।पढ़ें →