
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
- 1026 महमूद ग़ज़नवी ने मन्दिर लूटा और लिंग तोड़ा (अल-बिरूनी; इब्न अल-असीर)।
- 1169 चौलुक्य राजा कुमारपाल ने इसे पत्थर से फिर बनवाया (भाव बृहस्पति का प्रभास पाटन अभिलेख)।
- 1299 उलुग़ ख़ाँ के अधीन अलाउद्दीन ख़िलजी की सेना ने इसे फिर लूटा; स्थानीय राजाओं ने इसे पुनः स्थापित किया।
- 1706 औरंगज़ेब ने फिर मन्दिर को ढहाने का आदेश दिया, ताकि पूजा फिर आरम्भ न हो सके।
- 1783 अहिल्याबाई होल्कर ने पास में नया मन्दिर बनवाया, जहाँ पूजा चलती रही।
- 1951 सरदार पटेल के संकल्प से आरम्भ वर्तमान मन्दिर की प्रतिष्ठा 11 मई 1951 को राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद की उपस्थिति में हुई।












